नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पहले से पैक खाद्य उत्पादों पर पैकेज के सामने की तरफ पोषण संबंधी जानकारी देने वाले लेबल (एफओपीएल) के स्वरूप को लेकर केंद्र को निर्णय लेने का निर्देश देते हुए सवाल किया कि क्या भारत को अल्पविकसित देश बने रहना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि वह केंद्र सरकार के इस रुख से सहमत नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेषकर विकसित देशों के मानकों के अनुरूप चलना संभव नहीं है।
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पैकेजिंग पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी का एक ग्राफिक स्वरूप है, जो उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदने और स्वस्थ आहार का विकल्प चुनने के बारे में सुविचारित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पैक किया हुए खाद्य पदार्थों पर एफओपीएल अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने कहा कि जागरूकता पैदा करने के लिए एफओपीएल जरूरी है, खासकर बढ़ते बच्चों के बीच जो ‘जंक फूड’ के तेजी से आदी हो रहे हैं।
पीठ ने पैक किये हुए खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल शुरू करने में देरी को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को फटकार लगाई और कहा कि मोटापे को भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती के रूप में मान्यता दी गई है।
जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने कहा कि पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना मुश्किल होने के कारण एफओपीएल को लेकर अदालत के सुझाव पर विचार करना संभव नहीं है, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने सवाल किया, “क्या आप अदालत को हल्के में ले रहे हैं?”
चिली, इजराइल और कनाडा समेत कई देशों में अपनाई जाने वाली व्यवस्थाओं और नियमों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा, “हम केंद्र के उस रुख को स्वीकार नहीं करते, जिसमें वह कहता है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर विकसित देशों के मानकों के अनुरूप चलना संभव नहीं है। क्या भारत को अल्पविकसित देश बने रहना चाहिए? यही सवाल हम केंद्र के विचारार्थ रख रहे हैं।”
पीठ ने कहा कि दुनिया को यह पता होना चाहिए कि भारत अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर।
उसने केंद्र से विशेषज्ञों से परामर्श करने और एफओपीएल के स्वरूप को लेकर निर्णय लेने को कहा।
पीठ ने कहा, “यदि केंद्र स्वयं ऐसा करता है, तो बहुत अच्छा है। अन्यथा हम आगे के निर्देश जारी करने की कार्यवाही करेंगे।” अदालत ने सरकार को अंतिम निर्णय दो सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का समय दिया।
मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की गई है।
भाषा अमित दिलीप
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