कोलकाता, 15 अगस्त (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2010 के हत्या मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व माकपा विधायक मनोरंजन पात्रा और पार्टी के दो अन्य नेताओं को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि घटना के समय आरोपी कथित घटनास्थल पर मौजूद थे।
निचली अदालत ने चार बार विधायक रहे पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के तालडांगरा के निवासी पात्रा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह जमानत पर थे, जबकि अजबहोर खान और जितेन पात्रा जेल में बंद हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने तालडांगरा में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता मदन खान की हत्या के आरोप से माकपा के तीनों नेताओं को बरी करते हुए शुक्रवार को कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह पता चले कि घटना के समय वे कथित घटनास्थल पर मौजूद थे।
न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति एमडी शब्बर रशीदी की पीठ ने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि उनके पास वे हथियार थे, जिनका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। जांच के दौरान कोई हथियार भी बरामद नहीं हुआ।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए दो पत्रों से साबित होता है कि कथित अपराध के दिन और समय पात्रा पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूद थे।
मदन खान के बेटे इस्माइल खान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 जून, 2010 को पात्रा के नेतृत्व में माकपा समर्थकों के एक समूह ने घातक हथियारों के साथ उनके घर पर हमला किया और पिता की हत्या कर दी।
दिसंबर 2022 में निचली अदालत ने माकपा के इन तीनों नेताओं को हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
भाषा जोहेब माधव
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