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फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी का समर्थन किया

मुंबई, 15 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि यह बात सही थी और इसे स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस के कार्यक्रम में देखा जा सकता था।

फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद को तो हरा दिया गया है, लेकिन अराजकता फैलाने वाला नक्सलवाद का वैचारिक रूप अब भी दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने लगातार 13वें संबोधन में देश से नक्सलवाद के खात्मे का उल्लेख किया और कहा कि चुनौती को कभी भी कमतर नहीं आंकना चाहिए तथा सतर्क रहना होगा क्योंकि ‘‘हथियारी नक्सल’’ भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन ‘‘दिमागी नक्सली’’ अब भी मौके की तलाश में हैं।

उन्होंने नक्सलवाद को खत्म करने में अपनी सरकार की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘2014 में जब हमें मौका मिला तो हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया। आज खुशी है कि नक्सलवाद के पास आखिरी सांस लेने की भी ताकत नहीं रही।’’

मोदी ने आगाह किया कि इस चुनौती को अब भी कमतर नहीं आंकना चाहिए और सतर्क रहना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में ‘हथियारी नक्सल’ के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ मौके की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं तथा समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं।

फडणवीस ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने बहुत सही बात कही है। बंदूक वाला नक्सलवाद तो खत्म हो गया है। लेकिन, उससे भी खतरनाक बात यह है कि हम ऐसे लोगों में एक तरह का ‘दिमागी नक्सलवाद’ देख रहे हैं जिनके मन में अराजकता भरी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, आज कांग्रेस के कार्यक्रम में भी हमें ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला। 15 अगस्त को पूरा ‘वंदे मातरम्’ गायन का फैसला देश की संवैधानिक शक्तियों के दायरे में लिया गया था।’’

शनिवार को भाजपा ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर पार्टी के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर आपत्ति जताने का आरोप लगाया।

इसका उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा, ‘‘अगर यह खबर सच है कि सोनिया गांधी इसलिए नाराज थीं क्योंकि पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया, तो इसे अराजकता से भरे दिमाग वाले लोगों का ‘दिमागी नक्सलवाद’ ही कहा जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि संवैधानिक दायरे में लिए गए फैसले का इस तरह विरोध करना संवैधानिक सत्ता का अपमान है।

भाषा शफीक माधव

माधव