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प्याज का बफर स्टॉक: तीन बार बढ़ाने के बावजूद अब तक सिर्फ 2,000 टन की खरीद

(लक्ष्मी देवी ऐरे)

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) वर्ष 2026 के बफर स्टॉक के लिए प्याज की सरकारी खरीद धीमी गति से शुरू हुई है। खरीद की कीमत तीन बार बढ़ाने के बावजूद, एक जून से अब तक सिर्फ 2,000 टन प्याज ही खरीदा गया है।

खरीद का काम करने वाली दो प्रमुख एजेंसियों - नेफेड और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीसीएफ) - ने अब तक सरकार द्वारा 'मूल्य स्थिरीकरण कोष' (पीएसएफ) के तहत तय किए गए दो लाख टन के लक्ष्य का सिर्फ एक प्रतिशत ही हासिल किया है।

सत्र शुरू होने के बाद से खरीद की कीमत में तेजी से बदलाव किए गए हैं। 22 मई को कीमत 12.70 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो की गई, फिर 13 जून को 16.50 रुपये प्रति किलो तथा हाल ही में 20 जून को 17.30 रुपये प्रति किलो कर दी गई।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘एक जून से अब तक लगभग 2,000 टन प्याज खरीदा गया है।’’

बाजार के जानकारों का कहना है कि समस्या गुणवत्ता में अंतर की है। देश की सबसे बड़ी प्याज की थोक मंडी, नासिक के लासलगांव के व्यापारी रमेश पाटिल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘बाजार में 'ए-ग्रेड' प्याज की अच्छी कीमत मिल रही है। 17.30 रुपये प्रति किलो की सरकारी कीमत पर सरकारी एजेंसियां ​​मुख्य रूप से यूआरएस (अपेक्षाकृत कम सख्त मानकों वाले) प्याज तक ही सीमित हैं, क्योंकि ज्यादातर 'ए-ग्रेड' प्याज निर्यात के लिए भेजा जा रहा है।’’

लासलगांव के ही एक अन्य व्यापारी नितिन सेठ ने कहा कि किसानों की सोच एक अहम कारक है।

सेठ ने कहा, ‘‘मंडियों में प्याज की आवक अच्छी रही है, लेकिन कुछ किसान बेहतर कीमत की उम्मीद में अपना स्टॉक रोक रहे हैं। कीमत में तीन बार बढ़ोतरी भी उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।’’

सरकार द्वारा निकट भविष्य में खरीद की दर फिर से बढ़ाने की संभावना कम है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कीमत में एक और बदलाव से व्यापारियों के बीच गठजोड़ बनाने को बढ़ावा मिलने का जोखिम है। हालांकि, मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने धीमी शुरुआत को ज्यादा अहमियत नहीं दी। उन्होंने कहा कि पहले महीने में खरीद की रफ्तार मोटे तौर पर पिछले साल जैसी ही है और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इसमें तेजी आएगी।

बफर स्टॉक के लिए प्याज, रबी सत्र की फसल से लिया जाता है और इसे आपूर्ति कम होने वाले महीनों में कीमतों में अचानक उछाल को रोकने के लिए भंडारित किया जाता है, जिससे किसानों और ग्राहकों दोनों का बचाव होता है। बेमौसम बारिश की वजह से प्याज की गुणवत्ता पर असर पड़ा है।

सरकार ने वर्ष 2026 के लिए खरीद और भंडारण की प्रणाली में बदलाव किया है।

केन्द्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को प्रमुख स्टोरेज एजेंसी बनाया गया है, जो सख्त भंडारण नियमों के तहत काम करेगी। नेफेड और एनसीसीएफ ने भी कामकाज की क्षमता बेहतर करने के लिए अपनी खरीद करने वाली समितियों के नेटवर्क को व्यवस्थित किया है।

उत्पादन की बात करें तो, कृषि मंत्रालय ने फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए प्याज का उत्पादन 307.71 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग उतना ही है। अगर खरीद धीमी रहती है, तो आपूर्ति के मोर्चे पर इससे कोई खास राहत नहीं मिलेगी।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय