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लखनऊ आग हादसे में जान गंवाने वाले नौ लोगों का अंतिम संस्कार किया गया

लखनऊ, 23 जून (भाषा) लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक इमारत में लगी भीषण आग में झुलसकर जान गंवाने वाले 15 में से नौ लोगों का मंगलवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सुखमणि सिंह का अंतिम संस्कार आलमबाग के बैकुंठ धाम में, ज्योति, नीलेश और एक अन्य व्यक्ति का भैंसा कुंड घाट पर और अनुच्छा राय का लखनऊ के पिपराघाट में किया गया।

हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य का अंतिम संस्कार सीतापुर के एक स्थानीय श्मशान घाट पर किया गया। शाहजान को बाराबंकी के एक स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाया गया। वहीं संयम और सूरजभान की अंत्येष्टि कानपुर में की गयी।

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने 'पीटीआई—भाषा' को बताया, ''मरने वाले 15 लोगों में से आठ लोग लखनऊ के रहने वाले हैं। बाकी लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।''

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में अलग-अलग अंतिम संस्कार स्थलों पर मृतकों के परिजन से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना देते हुए दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि भी दी।

हादसे में जान गंवाने वाले सुखमणि सिंह के पिता प्रभजोत सिंह ने 'पीटीआई वीडियो' को बताया, ''सुखमणि ने मुझे फोन करके कहा कि पापा बिल्डिंग में आग लग गयी है, प्लीज मुझे बचा लो। उसके बाद कॉल डिसकनेक्ट हो गई। शायद उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी या कुछ और हुआ। हमने उसे कॉल करने की कोशिश की लेकिन उसने जवाब नहीं दिया।''

उन्होंने कहा, ''हमने आग के बीच फंसे चार-पांच बच्चों को नीचे कूदते हुए देखा।''

आग की घटना में जान गंवाने वाले नीलेश के पिता शत्रोहन ने बताया कि परिवार ने उसकी शादी के लिये लड़की देख ली थी लेकिन वह 2027 में शादी करना चाहता था क्योंकि वह आत्मनिर्भर बनना चाहता था।

हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य का अंतिम संस्कार सीतापुर के एक स्थानीय श्मशान घाट पर किया गया।

आदित्य की मां ने बेबसी भरी आंखों से लोगों से सवाल किया, ''हम उसके बिना कैसे जियेंगे?''

आदित्य के पिता अपना बेटा खोने के गम में इस कदर टूट चुके थे कि उसकी चिता को आग नहीं दे पाए, जिसकी वजह से उसके चाचा को मुखाग्नि देनी पड़ी।

सीतापुर से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक आदित्य के परिजन ने बताया कि आदित्य एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर में पढ़ाई करता था और पढ़ाता भी था।

आदित्य की बहन निष्ठा ने बताया कि आग लगने के समय उनके एक रिश्तेदार भी उसी इमारत में मौजूद थे। निष्ठा के मुताबिक उन्होंने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई और आदित्य से भी कूदने को कहा लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया।

परिवार का आरोप है कि अगर बचाव टीम समय पर पहुंच जाती, तो आदित्य की जान बच सकती थी।

आदित्य की मां कल्पना श्रीवास्तव ने कहा कि अगर बचाव कार्य समय पर शुरू हो गया होता, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता।

हादसे में मारे गये शाहजान को बाराबंकी के एक स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाया गया, जबकि अनामिका सामंत और सौमाल्या के परिजन उनके शवों को पश्चिम बंगाल ले गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सौमाल्या (28) के चचेरे भाई शुभम मलिक ने 'पीटीआई—भाषा' को बताया, 'सौमाल्या की शादी इसी साल दिसंबर में होने वाली थी। मुझे उसकी मौत के बारे में सोमवार देर रात करीब एक बजे पता चला। मैं हैदराबाद में काम करता हूं और सुबह करीब सात बजे लखनऊ पहुंचा।''

मलिक ने बताया कि सौमाल्या का अंतिम संस्कार पश्चिम बंगाल में उनके पैतृक जनपद दक्षिण 24 परगना जिले में किया जाएगा।

हादसे में जान गंवाने वाले कानपुर के निवासी करीबी दोस्त संयम विज और सूरजभान सिंह आग हादसे की शिकार हुई इमारत में स्थित एक एनिमेशन स्टूडियो में थ्रीडी आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे और दोनों अपने परिवार का सहारा थे।

कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि घटना के बाद वह लखनऊ के पुलिस आयुक्त के लगातार संपर्क में रहे और मृतकों पहचान होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत पीड़ितों के घरों पर भेजा।

उन्होंने बताया कि संयम और सूरजभान का अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह किया गया।

भाषा सलीम जोहेब जोहेब

जोहेब