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भारत-इटली के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी संस्कृति : एंटोनियो बार्टोली

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने कहा कि उनके देश को पूरा विश्वास है कि संस्कृति इटली व भारत के लोगों तथा समाजों के बीच मित्रता और संवाद का सशक्त माध्यम बनी रहेगी जिससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और गहरी होगी तथा उनके संबंध लगातार मजबूत होते जाएंगे।

बार्टोली सोमवार को यहां हुमायूं के मकबरे के संग्रहालय में आयोजित प्रदर्शनी ‘वन मदर, मैनी मदर टंग्स’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस प्रदर्शनी में दुर्लभ और बहुमूल्य कलाकृतियों तथा मूर्तियों का प्रदर्शन किया गया है। इनमें इटली के पुनर्जागरण काल के महान चित्रकार सान्द्रो बोत्तीचेल्ली की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘मैडोना एंड चाइल्ड’ भी शामिल है। फ्लोरेंस के म्यूजियो स्टिबर्ट से लाई गई 15वीं शताब्दी की यह कलाकृति पहली बार भारत में प्रदर्शित की जा रही है।

प्रदर्शनी में भारत और इटली के कई संग्रहालयों के साथ-साथ तीन निजी संग्रहों से लाई गई 27 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इनका संयोजन यहां इतालवी दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक एंड्रिया अनास्तासियो और दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कला इतिहास के प्रोफेसर नमन आहूजा ने संयुक्त रूप से किया है।

बार्टोली ने कहा, “हम इटली और भारत के 13 संग्रहालयों तथा तीन निजी संग्रहों की कलाकृतियों को एक साथ ला रहे हैं। यह मिलकर काम करने की इच्छा और क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है। संग्रहालय, विद्वान, सार्वजनिक संस्थान और अन्य साझेदार शैक्षणिक गुणवत्ता, सांस्कृतिक प्रासंगिकता तथा जनहित से जुड़ी उत्कृष्ट पहल तैयार करने के लिए साथ आए हैं।”

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “भारत अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति का वैश्विक विस्तार लगातार कर रहा है। हम सभ्यताओं के बीच सेतु निर्माण और मानवता की साझा सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के प्रति प्रतिबद्ध हैं।”

अगस्त के पहले सप्ताह तक आयोजित की जाने वाली इस प्रदर्शनी का आयोजन इतालवी दूतावास सांस्कृतिक केंद्र ने हुमायूं के मकबरे के संग्रहालय के सहयोग से किया है।

शेखावत ने इस बात पर भी जोर दिया कि संग्रहालय केवल अतीत की वस्तुएं रखने का स्थान नहीं हैं, बल्कि ये जीवंत संस्थाएं हैं जो पीढ़ियों, संस्कृतियों और सभ्यताओं को आपस में जोड़ती हैं।

उन्होंने कहा, 'इस प्रदर्शनी का एक सबसे प्रभावशाली पहलू यह है कि यह सदियों और महाद्वीपों के बीच एक संवाद स्थापित करती है।'

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश