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भारत-अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय व्यापार वार्ता, समझौते के ढांचे में बदलाव पर चर्चा

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारत और अमेरिका ने मंगलवार को उच्चस्तरीय व्यापार वार्ता की, जिसका उद्देश्य अमेरिकी शुल्क नीति में बदलावों के बाद प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को नया स्वरूप देना और उसके ढांचे में बदलाव करना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यहां अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।

दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया अस्थायी 10 प्रतिशत आयात शुल्क 24 जुलाई को ही समाप्त होना है।

ग्रीर की दो-दिवसीय भारत यात्रा के कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की थी।

वाणिज्य भवन में हुई इस वार्ता के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन भी मौजूद रहे।

इसके पहले दोनों देशों के व्यापार वार्ताकारों ने भी महीने की शुरुआत में दिल्ली में चर्चा की थी।

अमेरिकी दूतावास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है और इससे जहां अमेरिका में विनिर्माण रोजगार सृजित होंगे, वहीं भारत की आर्थिक वृद्धि को भी समर्थन मिलेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ग्रीर के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक में द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने तथा नए अवसरों पर चर्चा की गई।

यह व्यापार वार्ता फरवरी में घोषित समझौते की रूपरेखा की समीक्षा पर केंद्रित रही। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शुल्क नीति में बदलाव के कारण इस रूपरेखा पर असर पड़ा है।

पहले अमेरिका इस ढांचे के तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था, जिससे भारत को वियतनाम एवं अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलने की उम्मीद थी।

हालांकि, बाद में आए अमेरिकी अदालत के फैसले और ट्रंप प्रशासन द्वारा 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लगाए जाने से इस व्यवस्था पर असर पड़ा। इस वजह से दोनों पक्षों को समझौते के प्रमुख प्रावधानों पर पुनर्विचार करना पड़ा है।

अमेरिका ने दबाव बनाने के मकसद से 11-12 मार्च को भारत समेत करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं पर धारा 301 के तहत दो जांच शुरू कर दीं। इनमें से एक जांच कथित अत्यधिक औद्योगिक क्षमता पर केंद्रित है, जबकि दूसरी वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों से संबंधित है।

भारत के लिए व्यापार समझौते में तरजीही शुल्क व्यवस्था हासिल करना अहम लक्ष्य बन गया है। इसका कारण यह है कि हालिया शुल्क बदलावों से आसियान देशों सहित अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत का संभावित लाभ कम हो गया है।

रूपरेखा समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं—जैसे पशु चारा, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।

दूसरी तरफ, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान एवं उनके पुर्जे, कीमती धातु और प्रौद्योगिकी उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 40.89 अरब डॉलर था।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय