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एनआरएआई ने जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह के नाम पर रखीं इंडिया ओपन प्रतियोगिताएं

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने मंगलवार को घोषणा की कि जुलाई में होने वाली इंडिया ओपन प्रतियोगिताओं का नाम दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह के सम्मान में रखा जाएगा। हाल ही में हुए इन दोनों के निधन से खेल जगत शोक में डूब गया था।

एनआरएआई ने दोनों को ‘भारतीय निशानेबाजी और खेल प्रशासन के इतिहास की दो सबसे प्रभावशाली हस्तियां’ करार देते हुए कहा कि एक प्रतियोगिता का नाम “जसपाल राणा मेमोरियल इंडिया ओपन प्रतियोगिता (राइफल/पिस्टल स्पर्धा)” और दूसरी का नाम “राजा रणधीर सिंह मेमोरियल इंडिया ओपन प्रतियोगिता (शॉटगन स्पर्धा)” होगा।

संघ के अनुसार, “यह निर्णय दोनों महान हस्तियों के योगदान को सम्मान देने और भारतीय निशानेबाजी के विकास में उनकी भूमिका को याद रखने के लिए लिया गया है। उनकी उपलब्धियां खिलाड़ियों, कोचों और प्रशासकों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।”

अनुभवी खेल प्रशासक और पांच बार ओलंपिक में भाग लेने वाले रणधीर सिंह का 27 मई को 79 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया, जबकि दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा ने 12 जून को दिल्ली के एक अस्पताल में हृदय संबंधी समस्याओं के कारण 49 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।

एनआरएआई अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने कहा, “जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह दो ऐसी बड़ी हस्तियां हैं, जिनके योगदान ने भारत में निशानेबाजी के विकास और सफलता को बुनियादी रूप से आकार दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “जसपाल राणा ने एक खिलाड़ी, कोच और मार्गदर्शक के रूप में नई पीढ़ी को प्रेरित किया, जबकि राजा रणधीर सिंह ने खिलाड़ी और विश्व स्तरीय खेल प्रशासक दोनों रूपों में खेल जगत पर गहरा प्रभाव छोड़ा।”

उन्होंने यह भी कहा, “जुलाई में होने वाली इंडिया ओपन प्रतियोगिताओं का नाम उनकी याद में रखना, उनकी असाधारण विरासत और खेल जगत को मिलने वाली निरंतर प्रेरणा के प्रति एक उचित श्रद्धांजलि है।”

जसपाल राणा को भारतीय निशानेबाजी का एक सबसे प्रेरणादायी नाम माना जाता है। एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने अनेक पदक जीतकर देश को गौरव दिलाया। वे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के सबसे सफल एथलीट रहे और कुल 15 पदकों (जिनमें नौ स्वर्ण शामिल हैं) के साथ उन्होंने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में जीता गया स्वर्ण पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का निर्णायक क्षण माना जाता है। बाद में उन्होंने कोच और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए भारत में कई शीर्ष पिस्टल निशानेबाज तैयार किए।

राजा रणधीर सिंह ने भी भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। 1978 बैंकॉक एशियाई खेलों में उन्होंने भारत को निशानेबाजी में पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा। ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद वे खेल प्रशासन में सक्रिय हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित खेल प्रशासक बने। निधन से पहले तक वे एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष थे।

एनआरएआई के महासचिव पवनकुमार सिंह ने कहा, “इंडिया ओपन प्रतियोगिताएं घरेलू स्तर पर खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच हैं। इस पहल से खिलाड़ियों को उत्कृष्टता के उच्च मानकों की ओर प्रेरणा मिलेगी।”

भाषा

आनन्द सुधीर

सुधीर