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देर से घर से निकलने और लंबा रास्ता लेने के कारण छात्रा नीट परीक्षा से चूकी : बेंगलुरु यातायात पुलिस

बेंगलुरु, 23 जून (भाषा) बेंगलुरु यातायात पुलिस ने मंगलवार को कहा कि उसकी ‘‘तथ्यान्वेषी जांच’’ से पता चला है कि एक छात्रा 21 जून को आयोजित नीट परीक्षा में देर से घर से निकलने और अपेक्षाकृत लंबा मार्ग चुनने के कारण शामिल नहीं हो सकी।

पुलिस ने बताया कि यह निष्कर्ष सीसीटीवी फुटेज, आर. टी. नगर क्षेत्र की अभ्यर्थी और उसके अभिभावकों से बातचीत तथा मार्ग विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है।

यातायात पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि सीसीटीवी विश्लेषण और मार्ग सत्यापन से यह स्थापित हुआ है कि नीट अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद परीक्षा केंद्र पहुंची थी।

पुलिस ने कहा, ‘‘यातायात की स्थिति सामान्य पाई गई और आवश्यकता पड़ने पर यातायात पुलिस कर्मियों ने आवागमन सुगम बनाने में सहायता की। परीक्षा छूटने का मुख्य कारण घर से देर से निकलना और मार्ग का चयन था।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि बेंगलुरु यातायात पुलिस द्वारा नीट अभ्यर्थी की देरी को लेकर जारी ‘‘तथ्यान्वेषी जांच’’ रिपोर्ट कांग्रेस सरकार की ओर से सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके खुद को जनता के गुस्से से बचाने की 'बेहद निराशाजनक' कोशिश है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को 'बेशर्म और असंवेदनशील' बताते हुए भाजपा ने कहा कि जिन छात्रों का भविष्य अधर में लटका है, उनके प्रति सहानुभूति दिखाने के बजाय प्रशासन अपनी सारी ऊर्जा एक परेशान अभ्यर्थी के आने-जाने के तरीके का बारीकी से विश्लेषण करने में लगा रहा है।

तथ्यान्वेषी जांच का विवरण साझा करते हुए पुलिस ने बताया कि अभ्यर्थी दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर आर. टी. नगर स्थित अपने घर से निकली थी, जबकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अंतिम निर्धारित समय-सीमा अपराह्न एक बजकर 30 मिनट थी।

पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र क्षेत्र में अपराह्न एक बजकर 33 मिनट पर पहुंची, जो निर्धारित समय-सीमा के बाद था।

यातायात पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और मार्ग विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि अभ्यर्थी अंतिम समय-सीमा से केवल 33 मिनट पहले घर से निकली थी।

पुलिस ने बताया कि विश्लेषण से यह भी संकेत मिला है कि अभ्यर्थी ने उपलब्ध छोटे मार्ग की बजाय अपेक्षाकृत लंबा मार्ग चुना, जबकि छोटे मार्ग से वह जल्दी पहुंच सकती थी।

तथ्यान्वेषी जांच रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘उस दिन यातायात की स्थिति सामान्य थी और किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के कारण कोई बड़ा जाम नहीं था। मार्ग पर तैनात यातायात पुलिस कर्मियों ने आवश्यकता पड़ने पर अभ्यर्थी की आवाजाही सुगम बनाने में मदद की।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीट परीक्षा वाले दिन (21 जून) बेंगलुरु में कांग्रेस की एक बड़ी रैली आयोजित करने को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा था। भाजपा का आरोप था कि रैली के कारण यातायात बाधित हुआ और परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि तीन छात्राएं परीक्षा से वंचित रही थीं। उन्होंने कहा कि इनमें से एक छात्रा मगडी से आयी थी, जिसका कांग्रेस रैली से कोई संबंध नहीं था, दूसरी अभ्यर्थी के पास पुराना प्रवेश पत्र था और केवल एक अभ्यर्थी आर. टी. नगर क्षेत्र से आयी थी।

खरगे ने केंद्र सरकार द्वारा नीट के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों के द्वार पूर्वाह्न 11 बजे खोले गए थे और अपराह्न 1:30 बजे बंद कर दिए गए थे, जिसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

उन्होंने कहा कि यातायात संबंधी परामर्श पहले ही जारी कर दिया गया था और सहायता की आवश्यकता वाले लोगों के लिए हेल्पलाइन भी स्थापित की गई थी।

भाजपा की कर्नाटक इकाई ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि राज्य पुलिस का इस्तेमाल अपराधियों को पकड़ने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बेंगलुरु के बदनाम यातायात जाम को ठीक करने में करने के बजाय, गृह मंत्री अपने नाकाम प्रशासन को बचाने के लिए उस पर कॉर्पोरेट ‘‘फैक्ट-चेक’’ अभियान चलाने का दबाव डाल रहे हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया, 'सैकड़ों माता-पिता और छात्रों ने साफ़ तौर पर बताया कि वे आपके राजनीतिक कार्यक्रम की वजह से भयानक यातायात जाम में फंस गए थे। क्या वे सब झूठ बोल रहे हैं, मंत्री खरगे? क्या किसी परेशान छात्र का करियर खराब होना आपके लिए सिर्फ 'मार्ग विश्लेषण' का मामला है?'

भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने देश भर में होने वाली अहम नीट परीक्षा वाले दिन ही पैलेस ग्राउंड्स में एक बड़ा राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किया।

पार्टी ने आरोप लगाया, 'अब एक हताशा भरे इन्फोग्राफिक के जरिए यह दावा करना कि बड़ी-रैली का यातायात पर 'कोई खास असर नहीं' पड़ा, बेंगलुरु में रोज़ाना सफर करने वाले हर व्यक्ति की वास्तविकता के बिल्कुल उलट है। परीक्षा केंद्र के बंद गेट के बाहर किसी छात्र की रोती-बिलखती गुहार पर संस्थागत पछतावा होना चाहिए था। इसके बजाय, इसका जवाब अफ़सरशाही की बेरुखी और कांग्रेस नेताओं की छवि बचाने की हताशा भरी कोशिश के तौर पर मिला।'

भाषा अमित नरेश

नरेश