Breaking News

कश्मीर के गुलमर्ग में LOC के पास रहस्यमयी ब्लास्ट, 1 शख्स की मौत, 4 घायल     |   दिल्ली-NCR से कश्मीर तक 6.2 तीव्रता से कांपी धरती, अफगानिस्तान बना भूकंप का केंद्र     |   दिल्ली-NCR और जम्मू-कश्मीर में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके     |   राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी, 11 जुलाई की बैठक में नए महासचिव पर फैसला संभव     |   राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, बैठक में तय होगी अगली भूमिका     |  

ममता ने मदन मित्रा को मुख्य सचेतक बनाने का अनुरोध किया, विधानसभा अध्यक्ष का इनकार

कोलकाता, 23 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर संगठनात्मक और विधायी लड़ाई के गहराने के साथ ममता बनर्जी के खेमे ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक के पद से फिरहाद हकीम को हटाने और उनकी जगह मदन मित्रा को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है।

यह कदम तब उठाया गया जब कोलकाता के पूर्व महापौर नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए।

यह कदम तृणमूल नेतृत्व द्वारा हकीम को कारण बताओ नोटिस जारी करने और सोमवार को घोषित बागी गुट के समानांतर संगठनात्मक ढांचे में उनके पद स्वीकार करने के कुछ घंटों बाद उठाया गया। उन पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया।

ममता बनर्जी खेमे के सूत्रों के अनुसार, सोमवार रात लगभग 10:45 बजे विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को एक आधिकारिक ईमेल भेजा गया। इसमें उन्हें सूचित किया गया कि हकीम को अब तृणमूल का मुख्य सचेतक नहीं माना जाना चाहिए और अनुरोध किया गया कि इसके बजाय कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा को इस भूमिका के लिए मान्यता दी जाए।

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार सुबह विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय अध्यक्ष के कार्यालय गए और पिछली रात भेजे गए संदेश की छाया प्रति सौंपी।

हालांकि, अध्यक्ष कार्यालय ने अनुरोध पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने विपक्षी दल के भीतर विभाजन से उत्पन्न चल रहे कानूनी और प्रक्रियात्मक विवादों का हवाला दिया।

ममता बनर्जी खेमे के सूत्रों ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष के सामने तर्क दिया कि भले ही विधायी दल के नेतृत्व से संबंधित मामला न्यायिक जांच के दायरे में है, लेकिन मुख्य सचेतक के पद को लेकर कोई विशेष कानूनी विवाद नहीं है।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से इस पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई।

हकीम को बदलने की कोशिश तृणमूल के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच एक और टकराव को दर्शाती है, जो पार्टी संगठन और उसकी विधायी शाखा दोनों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

पार्टी नेतृत्व को पहला बड़ा झटका तब लगा जब तृणमूल के अधिकतर विधायकों ने पार्टी हाईकमान द्वारा चुने गए उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय को नकारते हुए ‘नेता प्रतिपक्ष’ के पद पर पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया।

बागी गुट ने तब हकीम की जगह तृणमूल विधायक अखरुज्जमां अंसारी को मुख्य सचेतक चुना था।

ममता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के रूप में ऋतब्रत बनर्जी की उम्मीदवारी को मंजूरी दी गई थी।

भाषा संतोष माधव

माधव