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देश की दवा आपूर्ति श्रृंखला चीनी आयात पर बहुत अधिक निर्भर: नीति आयोग

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) नीति आयोग ने मंगलवार को कहा कि भारत की औषधि आपूर्ति श्रृंखला जरूरी रसायन यानी कच्चे माल (एपीआई) और मुख्य शुरुआती सामग्री के लिए चीन से होने वाले आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।

आयोग ने व्यापार पर जारी तिमाही रिपोर्ट में यह भी कहा कि पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन करने की बढ़ती जरूरतों के कारण भारत में विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास की लागत काफी बढ़ गई है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत की औषधि आपूर्ति श्रृंखला प्रमुख रसायन, मुख्य शुरुआती सामग्री और अन्य जरूरी उत्पादों के लिए चीन से होने वाले आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। इन वस्तुओं के आयात में चीन की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है।’’

इसमें कहा गया है कि कमजोर नवोन्मेष और वाणिज्यिक परिवेश ने नवोन्मेषकों और लंबे समय के निवेश के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।

इसमें अधिक मूल्य वाले औषधि खंड में विविधता लाने पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट में पेटेंट वाणिज्यिकरण, अनुसंधान सहयोग और स्टार्टअप ‘इनक्यूबेशन’ को तेजी देने के लिए नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाने और उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच मजबूत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की भी बात कही गई है।

रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि भारत को दुनिया का दवाखाना माना जाता है।

लाहिड़ी ने कहा, ‘‘नीति आयोग ने पाया है कि भले ही हम औषधि क्षेत्र में मात्रा के मामले में अच्छा कर रहे हैं, लेकिन हमें मूल्य श्रृंखला में ऊपर जाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की कुछ साख है और उन्हें कोई कारण नहीं दिखता कि अगर भारतीय औषधि कंपनियां अच्छी गुणवत्ता और सही कीमत वाले ब्रांडेड उत्पाद लाती हैं, तो वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी जगह क्यों नहीं बना सकतीं।

भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं (मात्रा के हिसाब से) का एक बड़ा आपूर्तिकता है, जो अफ्रीका की लगभग 50 प्रतिशत, अमेरिका की 40 प्रतिशत और ब्रिटेन की 25 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की जरूरतें पूरी करता है।

बीते वर्ष वैश्विक औषधि बाजार की मांग 1,300 अरब डॉलर थी। इसमें 1,020 अरब डॉलर के औषधि और 261 अरब डॉलर के एपीआई यानी मुख्य रसायन शामिल थे।

भाषा रमण अजय

अजय