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वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने यूसुफ पठान की जमीन के मूल्यांकन का प्रस्ताव आमसभा को भेजा

वडोदरा, 22 जून (भाषा) वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) की स्थायी समिति ने पूर्व क्रिकेटर एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान के कथित अवैध कब्जे वाली जमीन की कीमत तय करने का प्रस्ताव आमसभा को मंजूरी के लिए भेजा है। यह जानकारी वडोदरा की महापौर गीताबेन मकवाना ने सोमवार को दी।

नगर निकाय ने पिछले शुक्रवार को 978 वर्ग मीटर के इस भूखंड की कीमत 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तय करने का प्रस्ताव पारित किया, जिससे इसकी कुल कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये हो गई।

अगर वीएमसी नीलामी के जरिये जमीन बेचना चाहती है, तो उसे भूखंड की कीमत तय करनी होती है। पिछले हफ्ते गुजरात उच्च न्यायालय ने पठान को राज्य की नीति के तहत जमीन पर अपना दावा आगे बढ़ाने के लिए एक महीने का समय दिया था।

वडोदरा की महापौर मकवाना ने पत्रकारों को बताया, ‘‘स्थायी समिति को नगर निगम के सात भूखंडों की अनुमानित कीमत की जानकारी मिली। ऐसे भूखंडों की कीमतें राज्य के शहरी विकास विभाग और वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण (वीयूडीए) की बैठकों में तय की जाती हैं। हमने मंज़ूरी के लिए यह मामला आमसभा को भेज दिया है।’’

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव आम सहमति से पारित हुआ और समिति ने 'जंत्री दर' के आधार पर कीमतें तय कीं।

'जंत्री दर' (दरों का वार्षिक विवरण) गुजरात में राज्य द्वारा तय की गई संपत्ति और जमीन की कम-से-कम कीमत है, जिसका इस्तेमाल स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की गणना के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अभी यह मामला उच्च न्यायालय में चल रहा है। जमीन निगम की है और उस पर कब्ज़ा किया गया है। हमने इस भूखंड को रिहायशी इस्तेमाल के लिए पुन: क्षेत्रीकरण की मंज़ूरी दे दी है और मामला आमसभा को भेज दिया है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि पठान ने शहर के टंडलजा इलाके में मौजूद इस जमीन का इस्तेमाल कार्यालय के लिए करने की मांग की थी।

मकवाना ने कहा, ‘‘निगम तय करेगा कि भूखंड से कब्ज़ा हटाया जाए या नहीं और अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेगा। हम छोटे-मोटे कब्जों पर भी ध्यान देते हैं, इसलिए इस बड़े कब्जे पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जा रही है।’’

वडोदरा नगर निकाय की स्थायी समिति ने अपने सात भूखंडों की कीमत तय करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पठान के कब्जे वाला भूखंड भी शामिल है।

नगर निकाय के एक अधिकारी ने बताया था कि कीमत तय करने का प्रस्ताव स्थायी समिति के सामने पेश किया गया था।

अगर वीएमसी किसी भूखंड को नीलामी के जरिये बेचना चाहती है, तो वह पहले भूखंड की कीमत तय करती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन भूखंडों को असल में नीलामी के लिए रखा जाएगा या नहीं, यह बाद में तय किया जाएगा।

जमीन की कीमत तय होने के बाद वह तीन साल तक मान्य रहती है, जिसके बाद भूखंड बेचने के लिए नयी कीमत तय करनी पड़ती है।

भाषा

सुरेश दिलीप

दिलीप