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केरल ने जंगली सूअरों के खतरे से निपटने के लिए विशेष अभियान शुरू किया: मंत्री

तिरुवनंतपुरम, 22 जून (भाषा) केरल के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने सोमवार को कहा कि वन्यजीव विभाग ने जंगली सूअरों के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।

जॉन ने बताया कि 15 जून को शुरू किया गया यह अभियान 30 जून तक जारी रहेगा तथा इसके तहत अब तक कुल 225 जंगली सूअरों को मारा जा चुका है।

विधानसभा में 'ध्यानाकर्षण प्रस्ताव' पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार जंगल के किनारे रहने वाले किसानों को होने वाली गंभीर परेशानियों को देखते हुए मानव और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की समस्या से निपटने के लिए एक नया तरीका अपना रही है।

उन्होंने कहा, 'वन विभाग किसानों का दुश्मन नहीं है। हम एक ऐसी नीति लागू करने का प्रयास कर रहे हैं जिसके तहत विभाग उनकी चिंताओं को दूर करने में एक सहायक के रूप में कार्य करे।'

जॉन ने कहा कि वन्यजीवों को रहवासी इलाकों में घुसने से रोकने के लिए राज्यभर में वन क्षेत्रों के किनारे 2,000 किलोमीटर से अधिक लंबी बाड़ लगायी गयी है जो सौर उर्जा से संचालित होती है।

केरल-कर्नाटक-तमिलनाडु की सीमाएं जहां मिलती हैं वहां स्थित वायनाड जैसे जिलों के वन क्षेत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मानव-पशु संघर्ष के साथ विशेष रूप से हाथियों से जुड़ी घटनाएं एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं।

मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे का वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए सरकार ने भारतीय वन्यजीव संस्थान को इन क्षेत्रों में हाथियों की वहन क्षमता पर एक अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

जॉन ने कहा कि उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, 50,000 से अधिक जंगली जानवर वन सीमाओं के बाहर रह रहे हैं और शिकारी जानवरों की कमी के कारण उनकी आबादी लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय पंचायत अध्यक्षों को मानद वन्यजीव प्रतिपालकों के रूप में नामित किया गया है। साथ ही उन्हें मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत जंगली सूअरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित निशानेबाजों की तैनाती को अधिकृत करने का अधिकार दिया गया है।

भाषा प्रचेता नरेश

नरेश