नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) सिख दंपतियों को अपने विशिष्ट कानूनी ढांचे के तहत पारंपरिक विवाह पंजीकृत करने में सक्षम बनाने वाला आनंद विवाह अधिनियम सिक्किम में एक जून से लागू हो जाएगा। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
इससे सिक्किम में सिख समुदाय के सदस्यों को पारंपरिक ‘आनंद कारज’ समारोह के तहत संपन्न विवाहों को सीधे पंजीकृत कराने की सुविधा मिलेगी।
सितंबर 2025 में उच्चतम न्यायालय के एक फैसले ने राज्य में 1909 के कानून के कार्यान्वयन को गति प्रदान की।
पंजीकरण के उद्देश्य से, कई सिख जोड़े 1955 के हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अपना विवाह पंजीकृत कराते हैं।
विधि मंत्रालय द्वारा 14 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘‘केंद्र सरकार सिक्किम राज्य में आनंद विवाह अधिनियम, 1909 के प्रावधानों के लागू होने की तिथि एक जून, 2026 निर्धारित करती है।’’
सिक्किम द्वारा स्थानीय पंजीकरण प्रक्रियाओं को रेखांकित करने के लिए आधिकारिक सिक्किम आनंद विवाह पंजीकरण नियम, 2026 तैयार और अधिसूचित किए जाने के बाद विधि मंत्रालय ने यह तिथि अधिसूचित की।
सितंबर 2025 में अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद नियमों को अधिसूचित किया गया था, जिसने कानून में प्रशासनिक खामियों को दूर किया था।
वर्ष 2012 में कानून में किए गए संशोधन के तहत 1909 के आनंद विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाहों के पंजीकरण के लिए राज्य स्तरीय तंत्र की शुरुआत की गई थी।
सिक्किम समेत कई राज्यों ने नियम नहीं बनाए थे।
उच्चतम न्यायालय ने इन राज्यों से नियम बनाने को कहा था।
इन राज्यों में नियमों के अभाव का मतलब था कि या तो वे अपनी शादी का पंजीकरण न कराएं या फिर व्यापक हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ऐसा करें।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश