नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) दिल्ली समेत देश के ज्यादातर हिस्सों से रविवार शाम को बकरीद का चांद नज़र आने की सूचना नहीं मिली, जिसके बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने 28 मई को ईद-उल-अज़हा का त्योहार मनाने का एलान किया।
ईद उल फित्र के विपरीत बकरीद चांद दिखने के 10वें दिन मनाई जाती है।
चांदनी चौक स्थित फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि रविवार शाम देश के विभिन्न हिस्सों में इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ‘ज़ुल हिज्जा’ के चांद को लेकर संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से भी चांद देखे जाने की पुष्टि नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि लिहाज़ा यह फैसला किया गया है कि बकरीद का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा।
ईद उल अज़हा या बकरीद का त्योहार, ईद उल फित्र के दो महीने नौ दिन बाद मनाया जाता है।
वहीं, मुस्लिम संगठन इमारत-ए-शरिया हिंद ने एक बयान में कहा कि देश के किसी हिस्से से चांद दिखाई देने की प्रमाणित सूचना प्राप्त नहीं हुई, इसलिए 28 मई को ईद-उल-अज़हा मनाई जाएगी।
जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने भी एक वीडियो बयान में 28 मई को बकरीद मनाए जाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के किसी हिस्से से चांद नज़र आने की सूचना नहीं है।
इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम अपने पुत्र इस्माइल को इसी दिन अल्लाह के हुक्म पर कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उनके बेटे को जीवनदान दे दिया और वहां एक पशु की कुर्बानी दी गई थी, जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है।
तीन दिन चलने वाले त्योहार में मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी हैसियत के हिसाब से उन पशुओं की कुर्बानी देते हैं, जिन्हें भारतीय कानूनों के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
भाषा नोमान दिलीप शफीक
शफीक