ग्वालियर, 17 मई (भाषा) कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अनियमितताओं के आरोपों के बीच तीन मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) (नीट-यूजी) 2026 को रद्द कर दिया था। इसकी पुन: परीक्षा 21 जून को निर्धारित की गई है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं और इससे लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की शिकायतें बार-बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों से सामने आ रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शिक्षा संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई सुझाव दिए थे, लेकिन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
सिंह ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय समिति की सिफारिशों को यह कहकर खारिज कर दिया कि समिति में विपक्षी सदस्य शामिल थे।
उन्होंने कहा, “यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसदीय समितियों का सम्मान करते हैं, तो धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए।”
नीट-यूजी परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।
दिग्विजय सिंह ने पश्चिम एशिया संकट के बीच घोषित मितव्ययिता उपायों को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार बड़े पैमाने पर सोना खरीद रही है।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सोने पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिससे इस कारोबार से जुड़े जौहरियों और कारीगरों पर असर पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद केंद्र सरकार ने लोगों को कोई राहत नहीं दी थी।
सिंह ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय उत्पाद शुल्क के जरिए 45 लाख करोड़ रुपये एकत्र किए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोटबंदी के कारण छोटे कारखाने बंद हो गए और अमीर तथा गरीब के बीच की खाई और बढ़ गई।
भाषा
सं, ब्रजेन्द्र रवि कांत