देहरादून, 17 मई (भाषा) उत्तराखंड के देहरादून जिले में मजदूरों के वेतन और ओवरटाइम से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शन के हिंसक होने के एक दिन बाद जिला प्रशासन ने रविवार को सेलाकुई और सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी।
देहरादून के जिलाधिकारी साविन बंसल के निर्देश पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) कृष्ण कुमार मिश्रा ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आदेश जारी किया।
क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के मजदूरों ने शुक्रवार शाम वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं और कथित रूप से पथराव भी किया, जिसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, निषेधाज्ञा के तहत क्षेत्र में हथियार, लाठी, डंडे, तलवार या अन्य घातक वस्तुएं ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हिंसा में इस्तेमाल हो सकने वाली ईंट, पत्थर और अन्य सामग्री जमा करने पर भी रोक लगाई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि बिना पूर्व अनुमति के नारेबाजी, जनसभा, रैली और प्रदर्शन आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
आदेश के तहत संबंधित क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। बसों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या अन्य वाहनों से जुलूस निकालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शांति, सुरक्षा और आपसी सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से ये कदम उठाए गए हैं।
एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इन आदेशों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।’’
उन्होंने बताया कि प्रशासन के अगले आदेश तक यह निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी।
प्रशासन ने आम जनता, श्रमिक संगठनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश