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ग्रेट निकोबार मामले में वन अधिकार कानून का पूरी तरह पालन हो: रमेश का ओराम को पत्र

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखकर आग्रह किया कि ग्रेट निकोबार परियोजना के संदर्भ में वन अधिकार कानून का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार का यह दावा झूठ है कि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और नीतिगत सुरक्षा उपायों का विधिवत अनुपालन किया गया है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय को आदिवासियों के अधिकारों और वन अधिकार कानून के तहत उचित प्रक्रियाओं, के घोर उल्लंघन को गंभीरता से लेना चाहिए और जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए।

रमेश ने पत्र में कहा, ' एक मई, 2026 को केंद्र सरकार द्वारा जारी 'द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: एफएक्यू' में कहा गया है कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और नीतिगत सुरक्षा उपायों का विधिवत अनुपालन किया गया है। जारवा नीति, 2004 और शोम्पेन नीति के अनुरूप, भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण, जनजातीय कार्य मंत्रालय और अन्य हितधारकों सहित सक्षम अधिकारियों और डोमेन विशेषज्ञों के साथ आवश्यक परामर्श किया गया था।'

उन्होंने दावा किया कि ये सब पूरी तरह झूठ है।

उन्होंने कहा, 'वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में जनजातीय कार्य मंत्रालय को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के मामले में जनजातीय समुदायों के अधिकारों और इस ऐतिहासिक कानून के तहत उचित प्रक्रियाओं के घोर उल्लंघन को गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत विश्वसनीय सुधारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।'

रमेश के अनुसार, वन अधिकार कानून के तहत आदिवासी समुदायों को निवास वाले ग्राम सभा को आवश्यक रूप से वन भूमि के किसी अन्य उपयोग की मंजूरी के किसी भी प्रस्ताव पर विचार करना होगा और प्रमाणित भी करना होगा कि इस अधिनियम के तहत उनके दावों का निपटान कर दिया गया है, इसके बाद ही ऐसी वन भूमि को किसी अन्य उपयोग में लाने के लिए सहमति दी जा सकेगी ।

उन्होंने कहा, ' उच्चतम न्यायालय ने 18 अप्रैल, 2023 के नियमगिरि के मामले में अपने फैसले में कहा था कि वन अधिकार कानून, 2006 के तहत ऐसी सहमति अनिवार्य है।'

उन्होंने कहा, 'अब सुनामी राहत कॉलोनियों में रहने वाले निकोबारी लोग अधिकारियों को बार-बार पत्र लिखकर अपनी पैतृक, पारंपरिक भूमि पर लौटने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन से उनकी वापसी की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध कर रहे हैं। लेकिन इन अनुरोधों का कुछ भी नतीजा नहीं निकला।'

उन्होंने कहा, 'जनजातीय कार्य मंत्री के रूप में मैं आपसे अंडमान और निकोबार प्रशासन को 18 अगस्त 2022 के प्रमाणपत्र, 13 अगस्त 2022 की अनुमंडलीय स्तरीय समिति (एसडीएलसी) कार्यवाही और 12 अगस्त 2022 के गैर-आदिवासियों के अवैध ग्राम सभा के संकल्प को वापस लेने का निर्देश देने का आग्रह करता हूं।'

उन्होंने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से वन अधिकार कानून 2006 को अक्षरशः लागू किया जाना चाहिए।

भाषा हक वैभव शोभना

शोभना