नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली राज्य विधि सेवा प्राधिकरण ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उपस्थिति में आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों के रूप में शामिल करने की पहल शुरू की।
'कम्युनिटी लीगल एम्पावरमेंट थ्रू हेल्थ एंड चाइल्डकेयर प्लेटफॉर्म्स' के तहत, कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एकीकृत बाल विकास सेवा के अंतर्गत कार्यरत अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की पहुंच और जमीनी उपस्थिति का उपयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता 'घर-घर जाकर न्याय सुनिश्चित करने' के लिए एक 'शांतिपूर्ण सेना' का गठन करेंगी।
उन्होंने कहा, 'संवैधानिक ढांचा यह है कि लोगों को न्याय के लिए आपके पास आने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए, बल्कि आपको उनके पास जाना चाहिए। अगर न्याय के लिए घर-घर जाकर न्याय दिलाने वाली कोई शांतिपूर्ण सेना है तो वह आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।'
उन्होंने कहा कि ये कार्यकर्ता गरीबों की समस्याओं को समझते हैं और उनसे प्रभावी ढंग से जुड़ सकते हैं।
इस पहल के तहत चयनित आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे सीधे परिवारों के साथ जुड़ सकें और कानूनी व कल्याणकारी मुद्दों की पहचान कर सकें।
भाषा
शुभम रंजन
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