नैनीताल, 23 मार्च (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने संबंधी उधमसिंह नगर जिला प्रशासन के आदेश को रद्द करते हुए किसानों को राहत दी है ।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि किसी कानूनी समर्थन के बिना किसानों को अपनी पसंद की फसलें उगाने से रोका नहीं जा सकता ।
किसानों ने जिलाधिकारी के चार फरवरी, 2026 के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसमें केवल जलभराव वाले खेतों में ही ग्रीष्मकालीन धान की खेती की अनुमति दी गई थी, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।
राज्य सरकार ने दलील दी कि उधमसिंह नगर जिला प्रशासन का यह निर्णय वैज्ञानिक संस्थानों से प्राप्त सुझावों पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि ग्रीष्म ऋतु में धान की खेती से भूजल स्तर कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
याचिकाकर्ता किसानों की ओर से पेश वकीलों बलविंदर सिंह, हर्षपाल सेखों और संदीप कोठारी ने दलील दी कि किसी कानूनी प्रावधान के बिना प्रशासन द्वारा इस प्रकार के प्रतिबंध लागू नहीं किए जा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की किसी भी कार्रवाई को कानून की स्वीकृति होनी चाहिए ।
इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन के विवादित आदेश को रद्द कर दिया तथा किसानों को अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने की अनुमति दी, चाहे वह भूमि जलमग्न हो या नहीं ।
भाषा सं दीप्ति धीरज
धीरज