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आरटीआई आवेदनों को खारिज किए जाने की दर 2024-25 में घट कर 3.26 प्रतिशत रह गयी: केंद्र

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) सरकार ने कहा है कि आरटीआई (सूचना का अधिकार) कानून के तहत दायर आवेदनों को खारिज किए जाने की दर 2013-14 के 7.21 प्रतिशत से घट कर 2024-25 में 3.26 प्रतिशत रह गयी।

कार्मिक एवं लोक शिकायत राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।

सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार में लोक प्राधिकारियों के संबंध में प्राप्त हुए, उत्तरित और अस्वीकृत आरटीआई आवेदन संबंधी डेटा केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की वार्षिक रिपोर्ट में उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि आरटीआई आवेदनों को खारिज किए जाने की दर, वर्ष 2013-14 में 7.21 प्रतिशत थी जो 2024-25 में घट कर 3.26 प्रतिशत रह गयी।

सिंह ने कहा कि यदि किसी आवेदक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आरटीआई के तहत जवाब प्राप्त नहीं होता है या वह लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) के निर्णय से व्यथित है तो आवेदक प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है और द्वितीय अपील केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष की जाती है।

इसके अलावा, जहां आवेदक को लगता है कि पीआईओ द्वारा अपूर्ण, भ्रामक या गलत सूचना प्रदान की गई है, वह केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) या राज्य सूचना आयोग (एसआईसी) को शिकायत कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए आकलन और समीक्षा एक सतत प्रक्रिया है। सीआईसी पारदर्शिता लेखा-परीक्षा की प्रगति की निगरानी करता है और सभी लोक प्राधिकारियों को लेखा परीक्षा के लिए प्रेरित करता है।

भाषा अविनाश सुभाष

सुभाष