Breaking News

हिंदू, सिख या बौद्ध के अलावा दूसरा धर्म अपनाया तो छिन जाएगा अनुसूचित जाति का दर्जा: SC     |   UCC बिल पेश होने से पहले गुजरात विधानसभा मे हंगामा, विपक्ष ने उठाया पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनों का मुद्दा     |   राजस्थान: 10वीं का रिजल्ट जारी, 94.23 फीसदी छात्र पास     |   मिडिल ईस्ट संकट पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मीटिंग खत्म, करीब डेढ़ घंटे चली चर्चा     |   बहरीन: ड्रोन एक्टिविटी का Amazon की क्लाउड सर्विस पर असर     |  

रिश्वतखोरी के मामले में एक व्यक्ति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में एक व्यक्ति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उसे शिकायतकर्ता से 24,000 रुपये की रिश्वत मांगने का दोषी पाया।

इस मामले की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने की।

विशेष न्यायाधीश ज्योति क्लेर ने दोषी जगमल सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा सात के तहत न्यूनतम वैधानिक सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और जुर्माना न भरने की स्थिति में 30 दिन के साधारण कारावास का प्रावधान किया।

अदालत के आदेश के अनुसार, “दोषी को शिकायतकर्ता से 24,000 रुपये की रिश्वत मांगने में शामिल पाया गया। परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्याय के हित में न्यूनतम सजा देना उचित है।”

अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए तर्क दिया था कि भ्रष्टाचार संवैधानिक व्यवस्था, लोकतंत्र और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।

हालांकि, बचाव पक्ष ने दोषी की 62 वर्ष की आयु, आपराधिक रिकॉर्ड न होने और उसे तथा उसकी पत्नी दोनों को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की।

​​बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि सिंह की पत्नी को आंखों की बीमारी है और वह देखभाल के लिए उस पर निर्भर है।

अदालत ने कहा, “इस मामले में गंभीर परिस्थिति अपराध की प्रकृति है जो व्यापक रूप से समाज को प्रभावित करती है। यह देश के आर्थिक हित और विकास को भी प्रभावित करती है। सामाजिक हित को निश्चित रूप से व्यक्तिगत हित से ऊपर रखा जाना चाहिए।”

भाषा

राखी नरेश

नरेश