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भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में ‘भरोसेमंद साझेदार’ बनकर उभरा: उपराज्यपाल संधू

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को कहा कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार पारिस्थिकी तंत्र में एक ‘भरोसेमंद साझेदार’ बनकर उभरा है।

भारत मंडपम में 'बिजनेस बियांड बांउड्रीज’ (सीमाओं से परे व्यापार) विषय पर इंडिया सॉफ्ट के 26वें संस्करण को संबोधित करते हुए संधू ने कहा कि भारत वैश्वीकरण में सिर्फ़ एक भागीदार होने से आगे बढ़कर अब इसे ‘आकार देने वाला’ बन रहा है।

सरकारी बयान के अनुसार, संधू ने कहा कि आज सीमाएं सिर्फ़ भूगोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें नियामकीय ढांचा, डेटा गवर्नेंस, आपूर्ति श्रृंखला की कमज़ोरियां और भू-राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सीमाओं से परे व्यापार का विचार इन सीमाओं को नज़रअंदाज़ करने के बारे में नहीं है। यह उन्हें समझने, उनसे निपटने और जहां संभव हो, उनके साथ तालमेल बिठाने के बारे में है।’’

वैश्वीकरण में आ रहे बदलावों पर ज़ोर देते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के व्यवधानों, जिनमें कोविड-19 महामारी भी शामिल है, ने केंद्रीकृत आपूर्ति श्रृंखला की कमज़ोरी को उजागर कर दिया है, जिससे अब मज़बूती और विविधीकरण की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ज़ोर देते हुए संधू ने कहा कि डिजिटल मंचों ने व्यवसायों को पारंपरिक बाधाओं को पार करने में सक्षम बनाया है, साथ ही डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी ज़िम्मेदारियां भी बढ़ाई हैं।

संधू ने वैश्विक व्यापार में ‘एमएसएमई’ और स्टार्टअप की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया और वित्त तक बेहतर पहुंच, निर्यात की आसान प्रक्रियाओं और मज़बूत कौशल विकास की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि विश्वास, पारदर्शिता और स्थिरता वैश्विक व्यापार के केंद्र में आते जा रहे हैं।

संधू ने कहा, ‘‘अंततः, वैश्विक व्यापार का भविष्य सीमाओं के न होने से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगा कि हम उन्हें कितनी प्रभावी ढंग से बदलते हैं... वे पार करने वाली बाधाएं नहीं हैं, बल्कि बनाने वाले पुल हैं।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय