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खाना निगलने में असमर्थ नाबालिग लड़की को मिला नया जीवन, दुर्लभ प्रकार के कैंसर से थी पीड़ित

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) दुर्लभ किस्म के कैंसर से पीड़ित और खाना निगलने में असमर्थ 14 वर्षीय एक लड़की को शहर के एक अस्पताल में नया जीवन मिला है।

इस बीमारी की वजह से लड़की का दैनिक जीवन और पोषण बुरी तरह प्रभावित हो रहा था।

चिकित्सकों ने किशोरी के ‘सिग्नेट रिंग सेल कार्सिनोमा’ नामक कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज किया।

यह कैंसर उस जगह था, जहां भोजन नली पेट से मिलती है।

चिकित्सकों ने एक बयान में बताया कि लड़की का रोजमर्रा का जीवन काफी तकलीफदेह हो गया था और उसे जांच के लिए द्वारका के मणिपाल अस्पताल लाया गया था।

चिकित्सकों ने बताया कि बायोप्सी सहित कई नैदानिक ​​परीक्षणों से उसके दुर्लभ कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के अध्ययनों के अनुसार, पेट और भोजन नली का कैंसर, विश्व स्तर पर काफी मामले सामने आते हैं लेकिन बाल रोगियों में इसका होना अत्यंत दुर्लभ है।

कम उम्र के रोगियों में इस तरह के कैंसर अक्सर स्पष्ट रूप से पहचाने जाने योग्य जीवनशैली या पर्यावरणीय जोखिम कारकों के बिना विकसित होते हैं।

चिकित्सकों ने बताया कि उपचार प्रक्रिया के तहत लड़की को सर्जरी से पहले पांच बार कीमोथेरेपी दी गयी।

मणिपाल कॉम्प्रीहेंसिव कैंसर सेंटर और ऑन्को रोबोटिक सर्जरी के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र कुमार डबास के नेतृत्व में ऑन्कोलॉजी टीम ने रोबोटिक सर्जरी द्वारा पेट के प्रभावित हिस्से को आसपास के लिम्फ नोड्स से हटा दिया।

इस उन्नत प्रक्रिया की बदौलत टीम ट्यूमर को हटाने में सफल रही और साथ ही आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को भी सुरक्षित रख पाई।

इस मामले में, डॉ. डबास ने पाया कि मरीज पर सर्जरी से पहले की कीमोथेरेपी का अच्छा असर हुआ जिससे चिकित्सकों को उन्नत सर्जिकल उपचार शुरू करने में मदद मिली।

रोबोटिक सर्जरी अधिक सटीकता, बेहतर दृश्यता और बेहतर परिणाम देती है, खासकर ऐसे नाजुक क्षेत्रों में।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश