नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) शेयर बाजार में ऑनलाइन निवेश के माध्यम से मुनाफा दिलाने के बहाने एक रियल एस्टेट डेवलपर से 3.7 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने के आरोप में विभिन्न राज्यों से छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि यह रैकेट साइबर अपराधियों द्वारा विदेशों से संचालित किया जा रहा था, जबकि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति फर्जी बैंक खातों का प्रबंधन करते थे और भारत के भीतर धोखाधड़ी से प्राप्त धन के लेन-देन को संभालते थे।
उन्होंने बताया कि मुंबई, कोटा (राजस्थान), नोएडा और लखनऊ में समन्वित छापों के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें अपराध में इस्तेमाल किए गए नौ मोबाइल फोन बरामद किए गए।
यह मामला तब सामने आया जब रियल एस्टेट डेवलपर कृष्ण कुमार ने शिकायत दर्ज कराई कि शेयर बाजार में ऑनलाइन निवेश से भारी लाभ दिलवाने का आश्वासन देकर उनसे लगभग 3.76 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
जब उन्हें मुनाफा प्राप्त नहीं हुआ और निवेश प्लेटफॉर्म फर्जी निकला, तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
विशेष प्रकोष्ठ पुलिस थाने में 15 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान, पुलिस ने बैंक खातों के विवरण का विश्लेषण किया और पाया कि धोखे से अर्जित राशि में से 10 लाख रुपये नवी मुंबई निवासी सिबलू कुमार के नाम पर एक फर्जी खाते में जमा किए गए थे। तकनीकी निगरानी के बाद, सिबलू कुमार का पता लगाया गया और उसे कोटा से गिरफ्तार किया गया।
उसके खुलासों के आधार पर, पुलिस ने मुरादाबाद निवासी एक अन्य आरोपी वसीम अहमद का पता दिल्ली के जंगपुरा इलाके में लगाया। मस्जिद लेन स्थित एक घर पर छापेमारी में उसे उसके तीन साथियों (राजेश खान, शाहिद अली और मन्नू इस्सर) के साथ गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि द्वारका निवासी एक अन्य आरोपी मनीष कुमार को भी गिरफ्तार किया गया, जो धोखाधड़ी से प्राप्त धन का प्रबंधन और अवैध खातों की व्यवस्था कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी मुख्य रूप से फर्जी बैंक खाते खोलने और संचालित करने, सिम कार्ड और मोबाइल फोन की व्यवस्था करने और धन के लेन-देन को छिपाने के लिए धन हस्तांतरण में सहायता करने की गतिविधि में शामिल थे।
संदिग्धों के उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण से कई बैंक खातों का विवरण और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
पुलिस ने बताया कि इस अभियान से पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए फर्जी निवेश मंच और उन्नत डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने वाले एक सुनियोजित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
पुलिस ने बताया कि धन के पूरे लेन-देन का पता लगाने और इस गिरोह में शामिल अन्य साजिशकर्ताओं और सहायकों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।
भाषा
राखी वैभव
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