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विकास के नाम पर खेजड़ी के हजारों पेड़ों की कटाई दुखद: अशोक गहलोत

जयपुर, चार फरवरी (भाषा) राजस्थान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विकास के नाम पर खेजड़ी के हजारों पेड़ों की कटाई को ‘‘दुखद’’ बताते हुए बुधवार को कहा कि राज्य सरकार को ‘‘हठधर्मिता छोड़कर’’ इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे लोगों से संवाद करना चाहिए।

बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन का महापड़ाव बुधवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया। बिश्नोई धर्मशाला के सामने बने पंडाल में अनेक पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे हैं।

ये आंदोलनकारी राज्य सरकार से चालू विधानसभा सत्र में ही पेड़ संरक्षण बिल लाने और राज्य में खेजड़ी काटने पर पूर्ण पाबंदी लगाने की मांग कर रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान की पहचान और बिश्नोई समाज सहित समस्त प्रदेशवासियों की आस्था के प्रतीक ‘‘खेजड़ी’’ को बचाने के लिए बीकानेर में जारी आंदोलन अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों की कटाई बेहद दुखद है।

उन्होंने कहा कि अमृता देवी बिश्नोई सहित सभी 363 शहीदों की विरासत को बचाने के लिए आज फिर संत और पर्यावरण प्रेमी अनशन पर हैं।

गहलोत ने कहा कि अब यह समय की जरूरत हो गई है कि पर्यावरण के मुद्दे पर सभी गंभीर हों।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से अपील की कि वह आंदोलनकारियों से बातचीत करें।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को हठधर्मिता छोड़कर तुरंत प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए और 'ट्री प्रोटेक्शन एक्ट' की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।’’

गहलोत ने कहा, ‘‘हम पर्यावरण की कीमत पर ऐसा विकास स्वीकार नहीं कर सकते जो हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय कर दे।’’

भाषा पृथ्वी

खारी

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