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नरवणे के ‘संस्मरण’ की प्रति लेकर संसद पहुंचे राहुल, प्रधानमंत्री पर साधा निशाना

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण की एक प्रति लेकर संसद पहुंचे और इसके एक अंश का हवाला देते हुए दावा किया कि जब चीन के टैंक भारत की सीमा की तरफ बढ़ रहे थे, उस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं किया था।

उनका कहना था कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में आते हैं तो वह यह पुस्तक उन्हें भेंट करेंगे।

उन्होंने संवाददाताओं को पुस्तक दिखाते हुए कहा, ‘‘वे (सरकार) कहते हैं कि यह किताब अस्तित्व में नहीं है, लेकिन यह रही किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह नरवणे जी की किताब है,, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसके अंश उद्धृत नहीं कर सकता।’’

राहुल गांधी ने दावा किया कि इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कही एक लाइन है कि ‘‘जो उचित समझो, वो करो।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘नरवणे जी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी को फोन कर बताया कि सीमा पर चीन के टैंक आ गए हैं, हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह जी का कोई उत्तर नहीं आया। नरवणे जी ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं 'ऊपर' से पूछता हूं। 'ऊपर' से आदेश आया कि जब चीन की सेना हमारी सीमा के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर नहीं करें।’’

उनका कहना था, ‘‘हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वो भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में नरेन्द्र मोदी जी ने संदेश दिया- 'जो उचित समझो, वो करो।’’ मतलब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है।’’

राहुल गांधी के मुताबिक, तत्कालीन सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, ‘‘मुझे बहुत अकेलापन महसूस हुआ, पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था।’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री में आज लोकसभा में आने की हिम्मत है क्योंकि अगर वह आते हैं, तो मैं खुद जाकर उन्हें यह किताब दूंगा।’’

राहुल गांधी निचले सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान इस संस्मरण के कुछ अंश उद्धृत करना चाहते थे, लेकिन आसन से इसकी अनुमति नहीं मिली। इसे लेकर बीते सोमवार से लोकसभा में गतिरोध बना हुआ है।

भाषा हक हक वैभव

वैभव