काहिरा, चार फरवरी (एपी) लीबिया के तानाशाह रहे मुअम्मर कज्जाफी के बेटे और कभी उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले सैफ अल-इस्लाम कज्जाफी की हत्या कर दी गई। लीबिया के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
लीबिया के मुख्य अभियोजक कार्यालय के अनुसार, 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम कज्जाफी की हत्या राजधानी त्रिपोली से 136 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित जिंटान कस्बे में हुई।
अभियोजक कार्यालय ने बताया कि शुरुआती जांच में यह पता चला कि सैफ अल-इस्लाम की हत्या गोली मारकर की गई है। हालांकि कार्यालय ने हत्या की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से नहीं बताया।
सैफ अल-इस्लाम के वकील खालिद अल-जैदी ने ‘फेसबुक’ पर उनकी मृत्यु की पुष्टि की लेकिन हत्या के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
उत्तरी अफ्रीकी देश लीबिया में लंबे समय से जारी संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में आयोजित राजनीतिक वार्ता में कज्जाफी का प्रतिनिधित्व करने वाले अब्दुल्लाह ओथमान अब्दुर्रहीम ने भी ‘फेसबुक’ पर उनकी मौत की जानकारी दी।
सैफ अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम ने बाद में एक बयान जारी करके कहा कि ‘‘चार नकाबपोश लोगों’’ ने उनके घर पर धावा बोला और ‘‘कायरों की तरह, छल से’’ उनकी हत्या कर दी। बयान में कहा गया कि उनकी हमलावरों से झड़प हुई जिन्होंने ‘‘अपने जघन्य अपराधों के सबूत मिटाने के प्रयास में’’ घर के सीसीटीवी कैमरे तक बंद कर दिए।
जून 1972 में त्रिपोली में जन्मे सैफ अल-इस्लाम लीबिया के लंबे समय तक तानाशाह रहे कज्जाफी के दूसरे बेटे थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी की थी और उन्हें कज्जाफी शासन में सुधारवादी चेहरा माना जाता था।
मुअम्मर कज्जाफी को 2011 में नाटो समर्थित जन विद्रोह में सत्ता से हटा दिया गया था। कज्जाफी ने 40 से अधिक वर्षों तक लीबिया पर शासन किया था। संघर्ष जारी रहने के बीच अक्टूबर 2011 में उनकी हत्या कर दी गई थी जो बाद में गृहयुद्ध में तब्दील हो गया। तब से देश में अराजकता कायम है और प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र समूहों और मिलिशियाओं के बीच बंटा हुआ है।
सैफ अल-इस्लाम को 2011 के अंत में जिंटान में लड़ाकों ने उस समय पकड़ लिया था जब वह पड़ोसी देश नाइजर भागने की कोशिश कर रहे थे। लीबिया की प्रतिद्वंद्वी सरकारों में से एक द्वारा माफी दिए जाने के बाद लड़ाकों ने उन्हें जून 2017 में मुक्त कर दिया। तब से वह जिंटान में ही रह रहे थे।
लीबिया की एक अदालत ने उन्हें हिंसा भड़काने और प्रदर्शनकारियों की हत्या करने का दोषी ठहराया और 2015 में उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। 2011 के विद्रोह से संबंधित मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा भी वह वांछित थे।
एपी सुरभि अमित
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