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केदारनाथ आपदा में लापता लोगों के कंकालों की खोज फिर शुरू, उत्तराखंड HC में दायर की गई थी याचिका

Uttarakhand: केदारनाथ में 2013 में आई भीषण आपदा में लापता हुए लोगों के कंकालों की खोज इस साल फिर से शुरू हो सकती है। इस त्रासदी में 3075 लोगों का आज तक पता नहीं चल सका है। इसके लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में सरकार से लापता हुए लोगों के कंकालों की खोज करके उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किए जाने की अपील की गई थी। सरकार अब तक चार बार टीमें भेज चुकी है। हाईकोर्ट के बार-बार निर्देशों के बाद भी लापता लोगों के अवशेषों की तलाश में अब तक पूरी तरह सफलता नहीं मिली हैं, जिससे परिवारों में निराश और आक्रोश बढ़ रहा हैं। 

2020 में खोजी दल ने चट्टी और गोमुखी क्षेत्र में 703 नरकंकाल बरामद किए गए थे। 2014 में 21 और 2016 में 9 कंकाल बरामद हुए थे। नवंबर 2024 को 10 टीमें विभिन्न पैदल मार्गो पर खोज में निकली थीं, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिल पाई थी। प्राप्त कंकालों के DNA परीक्षण के जरिए इनके परिजनों का पता लगाया जाता है।

ऐसे में इस साल दोबारा सर्च टीम भेजने की तैयारी की जा रही है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार इस साल भी सर्च टीम भेजने की तैयारी है। हम रिपोर्ट को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2016 और फिर 2019 में राज्य को निर्देश दिए थे कि वह 3075 लापता लोगों के अवशेषों की तलाश करे और उनका अंतिम संस्कार करे। आदेश के बाद सरकार की ओर से केदारनाथ के आसपास के पैदल मार्गों में सर्च टीमें भेजी गई थी।

केदारनाथ त्रासदी में मारे गए 702 लोगों की आज तक पहचान नहीं हो पाई है। इन मृतकों के डीएनए नमूनों की रिपोर्ट पुलिस के पास है। पर आज तक इन मृतकों की पहचान नहीं हो पाई। क्योंकि जिन 6 हजार लोगों ने अपने डीएनए दिए थे उनमें से किसी से भी इनका मिलान नहीं हो पाया है। इसलिए अब तक 702 लोगों को अपनी पहचान का इंतजार है।