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Uttarakhand: एलपीजी की कमी से होटल-रेस्तरां मालिकों की चिंता बढ़ी, प्रशासन से समाधान देने की अपील

Uttarakhand: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब उत्तराखंड के पर्यटन शहर नैनीताल में भी दिखाई देने लगा है। कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी और नई एडवाइजरी के बाद होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। 

होटल एसोसिएशन ने प्रशासन से राहत देने की मांग की है, वहीं जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है। होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पर्यटन सीजन आने वाला है ऐसे में अगर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी हुई तो होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ सकती है

वहीं एलपीजी वितरकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी है, जबकि घरेलू सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। हालांकि ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में तकनीकी समस्या के कारण बुकिंग की डीएसी नहीं आ रही है, जिससे डिलीवरी प्रभावित हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो सकती है।

वहीं जिलाधिकारी ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान ना देने की अपील की है कि घरेलू ग्राहकों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।अधिकारियों का कहना है कि कालाबाजारियों और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

इस बीच, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्ट्रीट फूड विक्रेता भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सिर्फ एक या दो सिलेंडरों से अपना कारोबार चलाने वाले चाय बेचने वालों से लेकर छोटे ढाबों के मालिकों तक कई लोगों का कहना है कि उनका स्टॉक या तो खत्म हो चुका है या खत्म होने की कगार पर है। देहरादून के छोटे बड़े ज्यादातर दुकानदारों का कहना है कि आपूर्ति जल्द शुरू न हुई तो वे अपना बिजनेस जारी नहीं रख पाएंगे।

कुछ दुकानदार अभी भी अपने घरों से लाए गए सिलेंडरों से काम चला रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि छोटे घरेलू सिलेंडर एक दिन भी नहीं चलेंगे, जिसके बाद उनके पास कारोबार बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने गैस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के वन मंत्री ने उत्तराखंड वन विकास निगम को लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इसे वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।