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IFS अधिकारी ने 3 लाख रुपये का टूर भत्ता उत्तराखंड CM राहत कोष में किया दान

उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजिव चतुर्वेदी ने अपनी ईमानदारी और सेवा भावना की एक मिसाल पेश की है। उन्होंने करीब 9 सालों में की गई 447 दिनों की सरकारी फील्ड ड्यूटी के बदले मिलने वाले सभी टूर भत्ते (TA/DA) को उत्तराखंड मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिया है। यह राशि 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

4 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में, जिसे उन्होंने उत्तराखंड वन विभाग के प्रमुख (HoFF) और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा, चतुर्वेदी ने दिसंबर 2016 से अगस्त 2025 तक की अपनी यात्राओं का पूरा ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि इन 447 दिनों की ड्यूटी के दौरान उन्होंने कभी भी कोई भत्ता नहीं लिया और अब पूरी राशि राहत कोष में जमा करने का अनुरोध किया है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सेवा करना और यहां की वनस्पति और जीव-जंतुओं का संरक्षण करना ही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को मुख्यालय से बाहर आधिकारिक दौरे पर जाने पर दैनिक भत्ता (DA) और अन्य खर्चों के लिए राशि मिलती है। लेकिन चतुर्वेदी ने यह राशि लेने के बजाय समाजहित में दान करना चुना। उन्होंने अपने काम के दौरान राज्य के कई दुर्गम इलाकों—जैसे मिलम ग्लेशियर, हर की दून, माणा पास, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, नीति घाटी, लिपुलेख आदि—का दौरा किया और वहां संरक्षण कार्य किए।

संजिव चतुर्वेदी ने राज्य में 25 पौध संरक्षण केंद्र स्थापित करने और हिमालयी जेंटियन, हिमालयी व्हाइट लिली, ताकिल पाम जैसी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भी अहम भूमिका निभाई। उनके इन प्रयासों की सराहना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भी की है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी उन्होंने हिमालयी मार्मोट, किंग कोबरा, फ्लाइंग स्क्विरल जैसे जीवों के संरक्षण पर काम किया है।

यह पहली बार नहीं है जब चतुर्वेदी ने इस तरह का कदम उठाया हो। इससे पहले भी वे कई बार अपनी पुरस्कार राशि दान कर चुके हैं—

  • 2015 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की पूरी राशि PM राहत कोष में दी
  • 2019 में पुलवामा हमले में शहीद CRPF जवानों के परिवारों के लिए ₹2.5 लाख दान किए
  • 2019 में हाईकोर्ट से मिली राशि भी PM राहत कोष में दी
  • अन्य पुरस्कारों की रकम भी जरूरतमंदों को दान की

खास बात यह है कि उनकी संपत्ति विवरण (IPR) के अनुसार उनके और उनके परिवार के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है। संजिव चतुर्वेदी का यह कदम न सिर्फ ईमानदारी का उदाहरण है, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।