उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत रूफटॉप सोलर लगाने के मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। इस सूची में अब केवल गुजरात ही यूपी से आगे है। वहीं, जिला स्तर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।
पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 6,87,433 सफल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। वहीं, महाराष्ट्र में 6,81,215 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। गुजरात 7,57,950 इंस्टॉलेशन और 2,839 मेगावाट की क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी योजना को अहम माना जा रहा है। योजना के तहत 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने वाले पात्र परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुल 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी शामिल है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।
रूफटॉप सोलर के बढ़ते इस्तेमाल से राज्य को अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा भी मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगाए गए सोलर पैनलों से करीब 2,317 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता जुड़ी है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से राज्य के लाभार्थियों को अब तक 4,652 करोड़ रुपये की सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जा चुकी है।
देशभर में अब तक हुए कुल 39.55 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 17.3 फीसदी है। इससे साफ है कि राज्य में घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। योजना का असर आम लोगों के बिजली बिल पर भी देखने को मिल रहा है। जालौन के राम प्रकाश के मुताबिक, नवंबर में घर पर सोलर पैनल लगवाने के बाद उनका करीब 1,600 रुपये का मासिक बिजली बिल अब शून्य हो गया है। वहीं, अयोध्या के राजेश कुमार ने बताया कि गर्मियों में एसी और अन्य बिजली उपकरणों के इस्तेमाल के बावजूद उनका बिजली बिल 4,500 रुपये से घटकर 1,000 रुपये से भी कम रह गया है।
इसके अलावा, नेट मीटरिंग की सुविधा के जरिए उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ भी हासिल कर सकते हैं। माना जा रहा है कि सब्सिडी, बिजली बिल में बचत और अतिरिक्त बिजली बेचने की सुविधा के कारण उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।