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योगी सरकार में महिला भागीदारी वाले स्टार्टअप्स में यूपी की बढ़ रही हिस्सेदारी, 174 से 2525 पहुंची संख्या

Lucknow: उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यह बढ़त अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में केवल 174 ऐसे स्टार्टअप्स थे जिन्हें डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त थी और जिनमें कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल थी। यह संख्या लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2025 में 2525 तक पहुंच गई। 

31 जनवरी 2026 तक भी 301 नए स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है। ये सभी स्टार्टअप्स डीपीआईआईटी की ओर से आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं। प्रदेश में इस बढ़त को योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए निवेश अनुकूल माहौल, प्रक्रियाओं में सरलता और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। इसका असर खासतौर पर महिला उद्यमिता पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अब निदेशक और साझेदार के रूप में सामने आ रही हैं।

केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के साथ राज्य स्तर पर मिले सहयोग ने इस वृद्धि को गति दी है। फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता मिल रही है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को भी मिला है, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरते स्टार्टअप केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। महिला भागीदारी में हो रही लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में उद्यमिता का दायरा व्यापक हो रहा है और महिलाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम न केवल विस्तार कर रहा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण के एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहा है। जहां नीतिगत समर्थन और बढ़ती भागीदारी मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं को जन्म दे रही है।