Breaking News

दिल्ली में मॉनसून की दस्तक, IMD ने दी जानकारी     |   मुंबई मानसून अपडेट: ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर थमी रफ्तार, कुर्ला-सायन जाम     |   पूर्वोत्तर में बाढ़ से भारी तबाही, मल्लिकार्जुन खड़गे ने जताया दुख     |   केतन मर्डर केस: पुलिस ने आरोपी सिया के लाई डिटेक्टर टेस्ट की कोर्ट से मांगी मंजूरी     |   दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के 10 विधायक आज EC से मिलेंगे, ऋतब्रत बनर्जी करेंगे नेतृत्व     |  

यूपी में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी, सीएम योगी के सख्त निर्देशों का असर

Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

कम हुई पराली जलाने की घटनाएं
मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है।

सेटेलाइट से की जा रही निगरानी
सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था
राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।