वाराणसी में गुरुवार को गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। नदी का पानी बढ़ने से घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है और नदी किनारे सामान्य गतिविधियां बाधित हो गई हैं। गंगा का बढ़ता पानी गंगा आरती स्थलों से लेकर शहर के प्रमुख श्मशान घाटों में शामिल मणिकर्णिका घाट तक पहुंच गया है। घाटों के आसपास पानी भरने के कारण मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की गतिविधियों को छतों और ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा है।
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर करीब 50 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नदी का जलस्तर फिलहाल 67.68 मीटर पहुंच गया है, जबकि वाराणसी में गंगा का खतरे का निशान 71.26 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3.58 मीटर नीचे है। हालांकि, लगातार बारिश और जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय आकलन के अनुसार, यदि नदी इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो अगले कुछ दिनों में यह खतरे के निशान तक पहुंच सकती है।
गंगा का पानी बढ़ने से वाराणसी के कई घाटों के बीच पारंपरिक रास्ते और संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो गए हैं। इससे एक घाट से दूसरे घाट तक आवाजाही मुश्किल हो गई है। गंगा आरती के आयोजन स्थलों पर भी बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। वहीं, मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की गतिविधियों को ऊंचे स्थानों पर करना पड़ रहा है।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों में चिंता बढ़ गई है। खासकर नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के आधार पर नदी के बढ़ने की रफ्तार और खतरे के निशान तक पहुंचने की संभावना की निगरानी की जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के पास जाने, जलमग्न इलाकों में प्रवेश करने और डूबे हुए रास्तों पर जाने से बचें। अगले 24 से 48 घंटे में गंगा के जलस्तर में होने वाली बढ़ोतरी के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।