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नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बन रहे युवा, यूपी राइज में दिखी नवाचार की ताकत

उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला बनाने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार की पहल को यूपी राइज कार्यक्रम में नई दिशा मिली। बेनेट यूनिवर्सिटी में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं ने तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), शिक्षा और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में नए समाधान प्रस्तुत किए। हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी डॉ. अजय यादव ने पोल्ट्री फार्मिंग में बीमारी की शुरुआती पहचान से जुड़े नवाचार के लिए पहला पुरस्कार जीता। उन्हें 25 हजार रुपये की नकद राशि दी गई। वहीं, सोनल कुकरेजा फर्स्ट रनर अप और सना शर्मा सेकेंड रनर अप रहीं। दोनों को ट्रॉफी प्रदान की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ बेनेट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राज सिंह, प्रो. सिद्धार्थ शंकर और मेंटर्स हर्षित देसाई, ज्योति तिवारी व राहुल जैन ने किया। इसमें युवाओं ने ड्रोन तकनीक, विज्ञान, एआई, शिक्षा और पशुपालन सहित कई क्षेत्रों में अपने आइडिया प्रस्तुत किए। इन नवाचारों का उद्देश्य समस्याओं के समाधान के साथ रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार करना था।

पोल्ट्री फार्मिंग में बीमारी की पहचान के लिए तकनीकी समाधान

पेशे से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय यादव ने पोल्ट्री फार्मिंग में पक्षियों की बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान और निदान के लिए तकनीक आधारित समाधान पेश किया। उनके अनुसार, इस नवाचार में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सहित विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य बीमारी का समय रहते पता लगाकर संभावित नुकसान कम करने में मदद करना है। मेंटर्स ने उनके आइडिया को प्रथम स्थान के लिए चुना। इसके लिए उन्हें 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

एआई ऐप से बच्चों की पढ़ाई होगी आसान

दिल्ली की सोनल कुकरेजा ने दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए एआई आधारित ऐप तैयार किया है। उनके मुताबिक, बच्चे पढ़ाई के लिए यूट्यूब समेत अलग-अलग ऑनलाइन मंचों पर सामग्री तलाशते हैं। इससे कई बार उन्हें सही जानकारी खोजने में परेशानी होती है और समय भी ज्यादा लगता है। उनका ऐप अलग-अलग पाठ्यक्रमों से जुड़ी पढ़ाई की समस्याओं के समाधान एक ही मंच पर उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। इस आइडिया के लिए सोनल कुकरेजा को फर्स्ट रनर अप चुना गया।

‘ट्रैवल्सी’ से ग्लोबल स्टार्टअप के साथ काम करने का मौका

दिल्ली की सना शर्मा ने ‘ट्रैवल्सी’ नाम से एक ऐसा मंच तैयार किया है, जिसके माध्यम से विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी अपनी शिक्षा के दौरान दूसरे देशों के स्टार्टअप के साथ काम कर सकते हैं। इससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और उद्यमिता की बारीकियां समझने का अवसर मिलता है। स्टार्टअप के साथ काम करने का अनुभव भविष्य में अपना कारोबार शुरू करने में भी मदद कर सकता है। इस नवाचार के लिए सना शर्मा को सेकेंड रनर अप चुना गया। उन्हें भी ट्रॉफी प्रदान की गई।

एआई और कौशल विकास पर जोर

बेनेट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राज सिंह ने शिक्षा में एआई और तकनीकी बदलावों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एआई शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने, समस्याओं के समाधान तलाशने और विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने में उपयोगी हो सकता है। नवाचार को व्यावहारिक अनुभव और कौशल विकास से जोड़ना युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करने में मददगार है।

कार्यक्रम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर एवं शिक्षाविद् सौम्या सिंह, एआई एजुकेटर और वनरोडमैप डॉट एआई के संस्थापक गौरव घई तथा शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के कंसल्टेंट चैतन्य के. चौबे और मोहम्मद दाऊद भी मौजूद रहे। मेंटर्स हर्षित देसाई, ज्योति तिवारी और राहुल जैन ने युवाओं को मार्गदर्शन दिया।

12 स्टार्टअप ने पेश किए अपने आइडिया

कार्यक्रम में ट्रिप्ज़ी, एनॉर्थ, स्टेपकोड, वर्डियोनेक्स, चिल्ड्रेन हू कोड, ज़ोरियन इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, स्यिंक, वेलकोरिस इंडस्ट्रीज़, प्रानिक्स टेक्नोलॉजी/स्मार्ट, पोल्ट्री फार्मिंग, ट्रैवल्सी और टेरासोल्स से जुड़े स्टार्टअप व नवाचार प्रस्तुत किए गए।

इन पहलों के जरिए तकनीक, शिक्षा, यात्रा और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में मौजूद समस्याओं के समाधान और रोजगार सृजन की संभावनाएं सामने आईं। यूपी राइज कार्यक्रम ने युवाओं को अपने विचार प्रस्तुत करने और उन्हें व्यावहारिक समाधान व उद्यम में बदलने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।