Breaking News

सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म तक न पहुंचे चाइल्ड पोर्नोग्राफी, गाइडलाइन बनाएं सरकार: SC     |   तुर्की में फिर आया बड़ा भूकंप, 5.8 की तीव्रता से हिली धरती     |   CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, नहीं तो देशव्यापी प्रोटेस्ट करेंगे: कॉकरोच पार्टी     |   महुआ मोइत्रा ने नई दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई     |   गुजरात BJP संगठन में बदलाव, अरुण बिन्नाडी राजकोट केंद्र के सह महामंत्री नियुक्ति     |  

घरेलू ओवरनाइट ट्रैवल में यूपी सबसे आगे, 15.7% हिस्सेदारी के साथ तमिलनाडु-राजस्थान से आगे

उत्तर प्रदेश ने घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, घरेलू ओवरनाइट ट्रैवल की प्रमुख श्रेणियों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी देश में सबसे अधिक रही है। राज्य अब धार्मिक पर्यटन के साथ विरासत, ग्रामीण पर्यटन, प्रकृति, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक अनुभवों को भी पर्यटन की नई ताकत के रूप में विकसित कर रहा है।

365 दिन वाली श्रेणी में यूपी की 15.7% हिस्सेदारी

सर्वे के अनुसार, 365 दिनों की अवधि में तीर्थ, छुट्टी, स्वास्थ्य और खरीदारी जैसे उद्देश्यों से होने वाली रात्रि यात्राओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही। इस श्रेणी में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 13.4 फीसदी और राजस्थान की 8 फीसदी रही। वहीं, पिछले 30 दिनों में कारोबार, सामाजिक यात्रा, शिक्षा-प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों से होने वाली रात्रि यात्राओं में भी उत्तर प्रदेश 15.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। इस श्रेणी में बिहार की हिस्सेदारी 10.5 फीसदी और तमिलनाडु की 9.6 फीसदी रही। सर्वे में राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश आने वाले यात्रियों को शामिल किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में यात्राओं का दायरा केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है।

3,000 से ज्यादा पर्यटन परियोजनाओं पर काम

पर्यटन नीति-2022 के तहत उत्तर प्रदेश में 12 थीमैटिक सर्किट के जरिए अलग-अलग पर्यटन स्थलों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल इसका प्रमुख उदाहरण है।

बाबा नीब करौरी सर्किट के जरिए फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, लखनऊ और वृंदावन जैसे स्थलों को जोड़ने की योजना है। वहीं विंध्य धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य, देवीपाटन और मां शाकुंभरी देवी जैसे क्षेत्रों में पर्यटन विकास परिषदों के माध्यम से योजनाबद्ध विकास किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में 3,000 से अधिक पर्यटन परियोजनाएं करीब 10,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई हैं।

चित्रकूट और मिर्जापुर में बढ़ी पर्यटकों की संख्या

पर्यटन का विस्तार अब बड़े धार्मिक शहरों से आगे छोटे शहरों और दूसरे पर्यटन स्थलों तक भी हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, चित्रकूट में पर्यटकों की संख्या 2024 में 1.18 करोड़ से बढ़कर 2025 में 3.65 करोड़ हो गई। इसी अवधि में मिर्जापुर में पर्यटकों की संख्या 1.41 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ दर्ज की गई। इन स्थलों में धार्मिक महत्व के साथ ऐतिहासिक, प्राकृतिक और स्थानीय सांस्कृतिक आकर्षण को भी पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

230 से ज्यादा गांवों में ग्रामीण पर्यटन

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 230 से अधिक चयनित गांवों में होमस्टे, स्थानीय खानपान और पारंपरिक हस्तशिल्प को पर्यटकों के अनुभव से जोड़ने की पहल की जा रही है।

ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के जरिए प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग के अनुसार, 2026 में वाराणसी के सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जिससे प्रदेश की बौद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

महिलाओं और अकेले यात्रा करने वालों पर फोकस

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात के अनुसार, प्रदेश में अकेले यात्रा करने वाले पर्यटकों और महिलाओं के समूहों यानी ‘ग्रुप ऑफ गर्ल्स’ पर्यटन को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके लिए भरोसेमंद ठहरने की सुविधाएं, बेहतर पर्यटक अनुभव और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। प्रमुख पर्यटन स्थलों को आसपास के विरासत स्थलों, स्थानीय खानपान और गांवों की परंपराओं से जोड़ने से पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ाने और स्थानीय कारोबार को लाभ पहुंचाने की योजना है।

युवाओं को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

युवाओं को स्थानीय पर्यटन और संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को अपने आसपास के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को देखने, समझने और उनकी जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव जैसे आयोजनों को भी पर्यटन और सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ा जा रहा है। अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में कला कार्यशालाओं की भी योजना है। लखनऊ के ‘लोकधारा’ कला शिविर में विशेषज्ञों और पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों की भागीदारी प्रस्तावित है।

कनेक्टिविटी से बढ़ा पर्यटकों का भरोसा

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के बढ़ते नेटवर्क के साथ मजबूत रेल कनेक्टिविटी से उत्तर प्रदेश की यात्रा आसान हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बेहतर कनेक्टिविटी को नए पर्यटन अनुभवों से जोड़ा जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक प्रदेश के अधिक से अधिक हिस्सों को देख सकें।

अमृत अभिजात ने कहा कि पर्यटन रणनीति में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ तीर्थ स्थलों को विरासत, गांव, प्रकृति, कला, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ना और स्थानीय संस्कृति को पर्यटन के जरिए आगे बढ़ाना है।