उत्तर प्रदेश का इंटरनेशनल ट्रेड शो चार साल में अपना दायरा तेजी से बढ़ा चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर वर्ष 2023 में शुरू हुए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में 2,400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। इस बार 90 देशों के 600 से ज्यादा विदेशी खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं, डेढ़ लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स के पहुंचने का अनुमान है।
पहले संस्करण में 1,914 प्रदर्शक शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,228 हो गई थी और 85 देशों के खरीदार ट्रेड शो में पहुंचे थे। पिछले संस्करण में कुल 5.07 लाख से अधिक लोगों ने ट्रेड शो का दौरा किया था, जिसमें 1.40 लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स शामिल थे। इस बार 4.5 लाख से अधिक सामान्य विजिटर्स के आने का अनुमान है।
छह देशों के विशेष पवेलियन
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम को पार्टनर देशों के रूप में शामिल किया गया है। इन देशों के विशेष पवेलियन बनाए गए हैं। यहां उत्तर प्रदेश के कारोबारी विदेशी कंपनियों और खरीदारों से सीधे संपर्क कर सकेंगे। कारोबार के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उद्यम को लेकर भी बातचीत की जा सकेगी।
1,882 करोड़ के एमओयू और 11,200 करोड़ की बिजनेस इन्क्वायरी
ट्रेड शो के पिछले संस्करण में कारोबार से जुड़े बड़े समझौते भी हुए थे। वर्ष 2025 में 1,882 करोड़ रुपये के 2,400 से अधिक एमओयू हुए थे। इसके अलावा 11,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजनेस इन्क्वायरी मिली थी। ओडीओपी पवेलियन के 466 स्टॉल से 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड और डील सामने आई थीं।
एक करोड़ से ज्यादा एमएसएमई को बाजार
उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। प्रदेश के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। ट्रेड शो के जरिए इन छोटे और मध्यम उद्यमों को देश-विदेश के खरीदारों तक पहुंच बनाने का मौका मिल रहा है। ट्रेड शो में भदोही के कालीन, मुरादाबाद के ब्रासवेयर समेत अलग-अलग जिलों के ओडीओपी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नए बाजार और विदेशी खरीदारों तक पहुंच मिल रही है।
80 हजार करोड़ से करीब दो लाख करोड़ पहुंचा निर्यात
उत्तर प्रदेश का निर्यात वर्ष 2017 में करीब 80 हजार करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर करीब दो लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2025-30 के तहत वस्तु और सेवा निर्यात को वित्त वर्ष 2024 के 21 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति में एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रदेश के सभी जिलों को निर्यात से जोड़ने की भी तैयारी है।
हस्तशिल्प से एआई और ईवी तक पहुंचा ट्रेड शो
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के उद्योगों का बदलता स्वरूप भी देखने को मिल रहा है। यहां हस्तशिल्प, हैंडलूम और पारंपरिक उत्पादों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रेड और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उत्पाद भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
एक तरफ भदोही के कालीन और मुरादाबाद का ब्रासवेयर जैसे पारंपरिक उत्पाद हैं, तो दूसरी तरफ एआई, ईवी और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी तकनीक भी मौजूद है। ऐसे में चार साल में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का दायरा पारंपरिक हुनर से लेकर नई तकनीक और वैश्विक कारोबार तक फैलता दिखाई दे रहा है।