अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में इस बार देश-विदेश की रामलीला और लोककलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस उत्सव में तीन देशों की चार रामलीला टीमें भगवान श्रीराम की कथा का मंचन करेंगी। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के साथ श्रीलंका और लाओस के कलाकार अपनी सांस्कृतिक शैली में रामलीला प्रस्तुत करेंगे।
इस आयोजन में करीब 2500 भारतीय और विदेशी कलाकार 12 मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इनके जरिए दर्शकों को अलग-अलग देशों और राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
दक्षिण अफ्रीका के कलाकारों की प्रस्तुति होगी खास
इस बार दक्षिण अफ्रीका की रामलीला खास आकर्षण रहेगी। कई पीढ़ियों पहले भारत से गिरमिटिया मजदूर के रूप में दक्षिण अफ्रीका गए लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी संस्कृति और रामकथा की परंपरा को संजोकर रखा। उन्होंने इस विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया।
अब उन्हीं भारतवंशियों के वंशज अयोध्या में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। दक्षिण अफ्रीका की एक टीम रामचरितमानस का गायन करेगी, जबकि दूसरी टीम रामलीला का मंचन करेगी। उनकी प्रस्तुति के जरिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की झलक देखने को मिलेगी।
श्रीलंका और लाओस के कलाकार भी दिखाएंगे हुनर
दीपोत्सव में श्रीलंका और लाओस के कलाकार भी अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार रामलीला प्रस्तुत करेंगे। अलग-अलग देशों की वेशभूषा, संगीत, नृत्य और अभिनय शैली में रामकथा का मंचन दर्शकों के लिए खास अनुभव होगा। इससे यह भी देखने को मिलेगा कि भगवान श्रीराम की कथा ने दुनिया के अलग-अलग देशों की संस्कृति में किस तरह जगह बनाई है।
12 मंचों पर 2500 कलाकारों की प्रस्तुति
संस्कृति विभाग की ओर से दीपोत्सव के लिए छह छोटे, चार मध्यम और दो बड़े मंच तैयार किए जा रहे हैं। इन 12 मंचों पर करीब 2500 कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।
असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के कलाकार भी रामकथा पर आधारित लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इन राज्यों के कलाकार अपनी स्थानीय लोक संस्कृति के जरिए रामलीला के प्रसंगों को दिखाएंगे।
अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय पहचान होगी मजबूत
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी के अनुसार, देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता बढ़ेगी। इससे स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
विभिन्न देशों की रामलीला और भारतीय राज्यों की लोककलाओं के प्रदर्शन से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। साथ ही, धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।