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योगी सरकार की यूपी राइज पहल से युवाओं को मिलेगा रोजगार और स्टार्टअप का मौका

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं के आइडिया को नवाचार, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में गाजियाबाद स्थित एचआरआईटी यूनिवर्सिटी में आयोजित यूपी राइज कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आधुनिक तकनीक पर आधारित अपने नवाचार प्रस्तुत किए। इन प्रोजेक्ट के जरिए युवाओं ने खेती, स्वास्थ्य, पशुपालन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं के समाधान दिखाए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर विजन और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर अपने आइडिया पेश किए। प्रतियोगिता के अंतिम चरण में 12 टीमों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य युवाओं को अपने विचारों को स्टार्टअप और रोजगार के अवसरों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

यूपी राइज से आइडिया को मिलेगा स्टार्टअप में बदलने का मौका

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यूपी राइज कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक के जरिए रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान कैसे निकाला जा सकता है। फसलों की बीमारियों की पहचान, प्याज की गुणवत्ता की जांच, बुजुर्गों की देखभाल और इलेक्ट्रॉनिक चिप में खराबी का पता लगाने जैसे प्रोजेक्ट आकर्षण का केंद्र रहे।

कार्यक्रम के दौरान गेम्स और अन्य गतिविधियों के जरिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, स्टार्टअप योजना और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। युवाओं को नौकरी तलाशने के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

प्याज की गुणवत्ता जांचने वाले प्रोजेक्ट को पहला पुरस्कार

प्रतियोगिता में टीम विजन-एक्स ने पहला स्थान हासिल किया। बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्राओं विदिशा गुप्ता, दीपा, अंजली, वंशिका, तनिष्का और सोनिया ने 'ऑनियन ग्रेड' नाम से एआई आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

यह तकनीक प्याज की तस्वीर का विश्लेषण कर उसके आकार, रंग, आकृति, सड़न और क्षति के आधार पर उसे ग्रेड ए, बी, सी या रिजेक्ट श्रेणी में रखती है। इससे प्याज की गुणवत्ता की जांच में एकरूपता लाने और किसानों तथा खरीदारों के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।

बुजुर्गों की देखभाल और इलेक्ट्रॉनिक चिप की निगरानी के लिए तकनीक

प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर अप रही रक्षक टीम ने 'साथ केयर' ऐप पेश किया। बीटेक तृतीय वर्ष के गगन दीप सिंह, आकर्ष श्रीवास्तव, दिवाकर सहाय निम, इशिता बलौदी और रुद्र कुमार के इस प्रोजेक्ट में दवाओं की स्कैनिंग, एक्सपायरी की जांच, रिमाइंडर, आपातकालीन अलर्ट और मेडिकल रिपोर्ट को समझने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

वहीं, सेकेंड रनर अप रही एल्गोरिथम आर्किटेक्ट टीम ने 'ड्रिफ्टगार्ड एआई' सॉफ्टवेयर प्रस्तुत किया। जैना सचदेवा, कुशाग्र राणा, मोहम्मद अरसलान खान और मरियम फातिमा की टीम का यह सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रॉनिक चिप और कंपोनेंट्स में असामान्य बदलावों की पहचान कर संभावित खराबी के संकेत देता है।

खेती और आपदा प्रबंधन में भी दिखी एआई की ताकत

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कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने फसलों की बीमारियों की पहचान, ड्रोन की मदद से खेती में सुधार, पशुओं की समस्याओं का समाधान और एआई आधारित शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट भी पेश किए। इसके अलावा रिमोट सेंसिंग के जरिए प्राकृतिक आपदाओं की आशंका का पहले से पता लगाने और बचाव के उपाय सुझाने वाले विचार भी सामने आए।

दुर्जोय दत्ता ने युवाओं को किया प्रेरित

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और बेस्टसेलिंग लेखक दुर्जोय दत्ता ने युवाओं के साथ अपनी सफलता का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ लेखन शुरू करने के बाद उन्होंने इसे अपने व्यवसाय में बदला। उन्होंने युवाओं को अपनी रुचि पहचानने और उसे करियर में बदलने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. नवीन राठी और कुलपति प्रो. डीके शर्मा भी मौजूद रहे। निर्णायक मंडल में हर्षित देसाई, ज्योति तिवारी और पूनम बंसल शामिल रहीं। यूपी राइज जैसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी तकनीकी प्रतिभा दिखाने, नए विचारों पर काम करने और उन्हें रोजगार तथा उद्यमिता के अवसरों में बदलने के लिए मंच प्रदान कर रहे हैं।