शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शिक्षकों के आचरण से विद्यार्थियों में भय और चिंता पैदा नहीं होनी चाहिए। शिक्षक बच्चों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका कर्तव्य है कि वे विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर उन्हें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करें।
शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने एक लेख के माध्यम से देशभर के शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उन शिक्षकों के प्रति सभी भारतीयों की ओर से आभार व्यक्त किया, जो करोड़ों विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, मूल्य और प्रेरणा का संचार करते हैं। राष्ट्रपति ने याद किया कि भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इच्छा व्यक्त की थी कि उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वान, प्रसिद्ध लेखक और सम्मानित राजनेता थे, लेकिन वे शिक्षक की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण मानते थे। इसी तरह, भारत के लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से जब पूछा गया था कि वे चाहते हैं कि लोग उन्हें वैज्ञानिक के रूप में याद रखें या राष्ट्रपति के रूप में, तो उन्होंने कहा था कि वे शिक्षक के रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे।
भारत की प्राचीन शिक्षण परंपरा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षकों को हमेशा अपने विद्यार्थियों से अपने बच्चों की तरह प्रेम करने की सीख दी गई है। उन्हें सभी विद्यार्थियों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए, क्रोध से बचना चाहिए, धैर्य रखना चाहिए, विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए और उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार उन्हें शिक्षा देनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने तैत्तिरीय उपनिषद की शिक्षावली में दिए गए शाश्वत संदेश ‘आचार्यदेवो भव’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश हजारों वर्ष पुराना होने के बावजूद आज भी प्रासंगिक है। अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि उन्हें कई बुद्धिमान और स्नेही शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक स्कूल के समय के बाद भी विद्यार्थियों को पढ़ाते थे और व्यक्तिगत रूप से उनकी देखभाल करते थे। उन्होंने बताया कि कक्षा सात पूरी करने के बाद वे अपने गांव से आगे की पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाली पहली लड़की थीं। बाद में भुवनेश्वर में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें शिक्षकों से भरपूर प्रेम और प्रोत्साहन मिला। उन्होंने कहा कि एक स्नेही और समर्पित शिक्षक विद्यार्थी के भीतर असीम संभावनाओं और प्रेरणा को जागृत कर सकता है। ऐसा प्रोत्साहन विद्यार्थियों को जीवन की कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने का साहस और बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का आत्मविश्वास देता है।
राष्ट्रपति ने महाकवि कालिदास के नाटक ‘मालविकाग्निमित्रम्’ का भी उल्लेख किया, जिसमें एक अच्छे शिक्षक को गहन ज्ञान रखने वाला और उसे प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सक्षम व्यक्ति बताया गया है। उन्होंने संस्कृत सूक्ति ‘सर्वत्र विजयम् इच्छेत्, शिष्यात् इच्छेत् पराजयम्’ का भी संदर्भ दिया, जिसका भाव है कि व्यक्ति हर जगह विजय की कामना करे, लेकिन अपने शिष्य के सामने वह शिष्य की सफलता और अपनी पराजय की कामना करे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षण केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। यह केवल करियर या नौकरी से बढ़कर मानवता को आकार देने का पवित्र कार्य है। आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग को प्रकाशमय करना शिक्षकों की महान जिम्मेदारी है। उन्होंने ओडिशा के स्कूल में शिक्षक के रूप में बिताए अपने दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत प्रस्तुतियों, खेलकूद और नाटकों की तैयारी में मदद की तथा स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों का आयोजन किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें विद्यार्थियों को सुंदर प्राकृतिक स्थानों पर पिकनिक के लिए ले जाने में भी बहुत खुशी मिलती थी। खेल और खोज के माध्यम से वे बच्चों को पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों की दुनिया से परिचित कराती थीं। उन्होंने बताया कि स्कूल छोड़ने के वर्षों बाद भी उनके विद्यार्थी उन्हें अपने पारिवारिक समारोहों में आमंत्रित करते हैं और अपनी खुशियां उनके साथ साझा करते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षक का रवैया, आचरण और व्यवहार बच्चों में भय और चिंता पैदा करने वाला नहीं होना चाहिए। इससे उनका मनोबल नहीं टूटना चाहिए और उनमें हीन भावना विकसित नहीं होनी चाहिए। अच्छे शिक्षक अपने विद्यार्थियों को उनका सर्वश्रेष्ठ स्वरूप बनने में मदद करते हैं। विद्यार्थियों को अच्छा इंसान बनने का मार्ग दिखाना शिक्षकों का पवित्र कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी नैतिक मूल्यों को बनाए रखते हुए समृद्धि और सफलता हासिल करते हैं, वही शिक्षक की सफलता का सबसे सच्चा प्रतिबिंब होते हैं। अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने अपील की कि देश को अपने समर्पित और ईमानदार शिक्षकों का हमेशा सर्वोच्च सम्मान करना चाहिए।