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नीलकंठ यात्रा को लेकर उत्तराखंड में खास ट्रैफिक प्लान, 30 जुलाई से शुरू होगी कांवड़ यात्रा

उत्तराखंड में नीलकंठ यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने खास ट्रैफिक व्यवस्था तैयार की है। कांवड़ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित आवाजाही के लिए बुधवार को अधिकारियों की एक समन्वय बैठक हुई। इसमें पैदल और वाहनों से नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रैफिक व्यवस्था पर चर्चा की गई।इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी। देहरादून ग्रामीण एसपी जय बालूनी ने बताया कि बैठक में हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनि की रेती और लक्ष्मण झूला के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर चर्चा हुई, ताकि नीलकंठ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुनि की रेती क्षेत्र में IDPL को मुख्य पार्किंग स्थल बनाया गया है। बड़े वाहनों से आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन IDPL में पार्क करने के बाद बैराज के रास्ते पैदल नीलकंठ जा सकेंगे। वहीं, छोटे वाहनों से आने वाले श्रद्धालु नटराज बाईपास से मुनि की रेती होते हुए गरुड़ चट्टी की ओर जाएंगे। वापसी के लिए लक्ष्मण झूला से बैराज और चीला के रास्ते का इस्तेमाल किया जाएगा।

अगर बिन नदी में बाढ़ आती है या शाम 6 बजे के बाद वाहनों की आवाजाही बंद होती है, तो ट्रैफिक को श्यामपुर की ओर मोड़कर बैराज के रास्ते हरिद्वार भेजा जाएगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग पार्किंग स्थलों, ट्रैफिक रूट और महत्वपूर्ण ड्यूटी प्वाइंट्स की भी पहचान की है। अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।

एसपी ने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री नीलकंठ यात्रा के लिए उत्तराखंड आते हैं और राज्य उनका स्वागत करता है। इस बार भी प्रशासन श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है। उन्होंने कांवड़ यात्रियों से अपील की कि वे शांतिपूर्वक यात्रा करें और किसी भी तरह के विवाद या परेशानी से बचें। कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों की एक प्रमुख धार्मिक यात्रा है। कांवड़िए हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर आते हैं। इसके बाद वे इस पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।