जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की।
इस विशेष कार्यक्रम में महामंडलेश्वर संविदानंद सरस्वती स्वामी जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने कहा कि हमें बचपन से जो इतिहास पढ़ाया गया है, उसमें कई जगह गलतियां और बदलाव किए गए हैं। महाराज जी ने कहा मुगलों के शासन के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज और पेशवाओं का समय आया, और उसके बाद अंग्रेजों का शासन रहा। स्वामी जी के अनुसार, अंग्रेजों के काल में अनेक ग्रंथों और पुराणों में हस्तक्षेप किया गया, जिसका प्रभाव आज भी समाज पर देखा जा सकता है।
महाराज जी ने कहा कि हम गौ माता की रक्षा करेंगे, लेकिन यह कैसे संभव होगा और इसके लिए क्या प्रावधान हैं, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यहां सभी लोग मंच पर आकर गौ माता की रक्षा की बात करते हैं, हमने गौशालाएं भी खोली हैं, फिर भी हम बार-बार यही सवाल उठाते हैं कि गौ माता की रक्षा कैसे की जाए।
उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा तभी संभव है जब कोई भी व्यक्ति अपने त्योहारों या किसी भी कारण से उनकी बलि न दे। महाराज ने कहा कि उन्होंने स्वयं कुरान का अध्ययन किया है और उसमें कहीं भी गौ बलि का प्रावधान नहीं है। उनके अनुसार, यह मुद्दा दो धर्मों के बीच विवाद का कारण बन गया है, जबकि धार्मिक ग्रंथों में इस प्रकार का उल्लेख नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इस विषय पर सही जानकारी और अध्ययन की आवश्यकता है। समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करना जरूरी है और इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मगुरुओं को अपने-अपने धर्म का सही अध्ययन कर लोगों को इंसानियत, शांति और आपसी सम्मान का संदेश देना चाहिए। अंत में महाराज ने कहा कि समाज में एकता और समझ बढ़ाकर ही ऐसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है, जिससे आपसी भाईचारा मजबूत हो।