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कंगना रनौत को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, AI डीपफेक और फर्जी वीडियो पर रोक लगाने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज और अन्य व्यक्तिगत पहचान का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए डीपफेक, एडिट किए गए वीडियो और फर्जी भाषणों पर भी लागू होगा।

जस्टिस विकास महाजन ने 8 अक्टूबर को दिए आदेश में मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक को निर्देश दिया कि कंगना रनौत की ओर से चिह्नित आपत्तिजनक सामग्री को आदेश की कॉपी मिलने के 72 घंटे के भीतर हटाया जाए। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग को संबंधित इंटरनेट और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के माध्यम से चिह्नित वेबसाइटों तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी करने को कहा गया है। ये निर्देश अगली सुनवाई तक लागू रहेंगे।

AI से बनाए गए फर्जी वीडियो और तस्वीरों पर कोर्ट सख्त

कंगना रनौत ने अपने व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से फर्जी बयान, AI से तैयार सामग्री, बदली हुई तस्वीरें और एडिट किए गए ऑडियो-वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं।

कोर्ट ने याचिका और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद कहा कि कंगना रनौत की सार्वजनिक पहचान और प्रतिष्ठा को देखते हुए उन्हें अपने व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की रक्षा करने का अधिकार है। इसमें उनकी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल और व्यावसायिक लाभ के लिए उसका दुरुपयोग रोकना भी शामिल है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा AI से तैयार, बदली हुई और अश्लील या यौन प्रकृति की डीपफेक सामग्री पर भी लागू होती है। अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कंगना की छवि और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचने की आशंका वास्तविक है।

फर्जी बयानों से लोगों को गुमराह करने पर जताई चिंता

अदालत ने कहा कि AI या अन्य तरीकों से तैयार ऐसे वीडियो और ऑडियो लोगों को यह विश्वास दिला सकते हैं कि कंगना रनौत ने वास्तव में कोई बयान दिया है, किसी विचार का समर्थन किया है या किसी गतिविधि में हिस्सा लिया है, जबकि ऐसा हुआ ही नहीं। कोर्ट के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की तस्वीर और उसके वर्तमान पद के साथ फर्जी बयान या टिप्पणियां जोड़ी जाती हैं, तो इससे गलत जानकारी फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।

कंगना के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता साकेत सिकरी ने दलील दी थी कि ऐसी सामग्री का प्रसार उनके व्यक्तित्व अधिकारों, प्रचार संबंधी अधिकारों, पहचान और गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इससे उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच सकता है।

बिना अनुमति नाम, आवाज और पहचान के इस्तेमाल पर रोक

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में संबंधित पक्षों और अज्ञात व्यक्तियों को कंगना रनौत की अनुमति के बिना उनकी पहचान से जुड़ी सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, साझा करने, प्रसारित करने या उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोक दिया है। इस रोक में AI से तैयार सामग्री, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया, बदले हुए वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग, फर्जी भाषण, झूठे विज्ञापन समर्थन और उनकी नकल करके बनाई गई सामग्री शामिल है।

इसके अलावा, ऐसे अकाउंट, पेज, प्रोफाइल, चैनल या वेबसाइट बनाने और चलाने पर भी रोक लगाई गई है, जो झूठा दावा करें कि उनका कंगना रनौत से कोई संबंध है या उन्हें उनका समर्थन अथवा अनुमति प्राप्त है।

मेटा और सरकारी विभागों को अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा को अपने प्लेटफॉर्म पर चिह्नित आपत्तिजनक वीडियो, रील, पोस्ट, अकाउंट और चैनल हटाने या उन तक पहुंच बंद करने का निर्देश दिया है। संबंधित सरकारी विभागों को चिह्नित वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए इंटरनेट और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है।

मेटा और दोनों सरकारी विभागों को दो सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। कोर्ट ने कंगना को यह अनुमति भी दी है कि मुकदमा दायर करने के बाद सामने आने वाले नए आपत्तिजनक लिंक, अकाउंट, चैनल या सामग्री की जानकारी दी जा सके। ऐसी सामग्री को हटाने के लिए उन्हें हर बार नया मुकदमा दायर करने की जरूरत नहीं होगी।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट मुख्य रूप से उल्लंघन करने वाला नहीं है, लेकिन आदेश के तहत उस पर रोक लग गई है, तो वह व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन न करने का आश्वासन देकर अदालत से राहत मांग सकता है।

दिसंबर 2026 और फरवरी 2027 में होगी अगली सुनवाई

अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में सेवा और लिखित जवाब से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 दिसंबर 2026 की तारीख तय की गई है। वहीं, मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027 को अदालत में होगी।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि दो पक्षों ने मुकदमे की अग्रिम कॉपी मिलने के बाद विवादित सामग्री हटा दी थी। कंगना के वकील की सहमति के बाद इन दोनों पक्षों के नाम मुकदमे से हटाने का आदेश दिया गया।