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यूपी के 5 शहरों में फास्ट फूड और रेस्टोरेंट पर छापेमारी, 7 यूनिट्स के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति

उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पांच जिलों में फास्ट फूड और रेस्टोरेंट प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण किया। ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत कानपुर नगर, आगरा, गाजियाबाद, प्रयागराज और वाराणसी में यह कार्रवाई की गई।

निरीक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठानों में गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं कीड़े और चूहे पाए गए तो कहीं साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली। कई जगह वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था नहीं थी। कुछ प्रतिष्ठानों में एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री के इस्तेमाल की बात भी सामने आई। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानते हुए विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की। पांचों जिलों में कुल 7 यूनिट्स के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है।

जांच के दौरान कई खाद्य प्रतिष्ठानों में इंसेक्ट और रोडेंट इन्फेस्टेशन यानी कीड़े और चूहों की समस्या मिली। कुछ जगहों पर हाइजीन और सैनिटेशन की स्थिति बेहद खराब थी। कई प्रतिष्ठानों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों के अलग भंडारण और प्रसंस्करण की उचित व्यवस्था नहीं मिली। कुछ जगह नालियों में गंदा पानी और कचरा जमा था, जिससे खाद्य पदार्थों के दूषित होने की आशंका जताई गई। इसके अलावा कुछ निर्माण स्थलों पर एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ भी मिले।

कानपुर के टुंडे कबाबी में हाइजीन और सैनिटेशन की स्थिति खराब पाई गई। खाद्य प्रोसेसिंग एरिया में दुर्गंध थी और कच्चे मीट का रखरखाव उचित तरीके से नहीं किया जा रहा था। वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था भी नहीं थी। नाली में पानी जमा होने के कारण दुर्गंध और खाद्य पदार्थों के दूषित होने की स्थिति सामने आई। वाराणसी के वॉव मोमोज में पैक्ड खाद्य पदार्थों पर भविष्य की निर्माण तिथि अंकित होने की स्थिति पाई गई। इसके अलावा परिसर में एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक और सॉस का भंडारण और उपयोग भी पाया गया।

आगरा में संजय पैलेस के पास स्थित अमृतसरी कुलचा में हाइजीन और सैनिटरी कंडीशन खराब मिली। खाद्य पदार्थों की पैकिंग अनुचित कागज में की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान दीवारों से पेंट की परतें निकलती मिलीं और एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल की स्थिति भी सामने आई। व्यवस्था में सुधार होने तक खाद्य कारोबार बंद रखने की संस्तुति की गई।

गाजियाबाद के एसी एंटरप्राइज के डीप फ्रीजर में चिकन और मटन से रक्त का रिसाव पाया गया। इससे क्रॉस-कॉन्टेमिनेशन की आशंका थी। यहां वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था भी नहीं थी। प्रोसेसिंग एरिया और बेसमेंट में काफी गंदगी मिली, जबकि डस्टबिन बिना ढक्कन के रखे थे। फ्लॉको क्लॉक्ज, युवराज नगर में डीप फ्रीजर बेहद गंदा मिला। वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों का सेग्रीगेशन नहीं था। चिमनी और अन्य उपकरणों पर गंदगी थी और बर्तनों की सफाई भी पर्याप्त नहीं पाई गई।

नाथूस, राज नगर में नाली में कचरा जमा होने से दुर्गंध की स्थिति थी। परिसर में कीड़े और कॉकरोच पाए गए। मिठाइयों के बचे हुए खाद्य पदार्थों का गलत तरीके से भंडारण, तेल का बार-बार इस्तेमाल और खुले कंटेनरों में खाद्य पदार्थ रखे मिले। सब्जियां भी खुले में रखी थीं। यहां लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई। बीकानेरवाला, राजेंद्र नगर में भी इंसेक्ट इन्फेस्टेशन मिला। सफाई व्यवस्था खराब थी, क्लीनिंग एरिया गंदा था और ड्रेनेज चोक पाया गया। किचन में डस्टबिन खुले में रखे थे। जनहित को देखते हुए यहां भी लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई।

विभाग ने कहा कि खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, क्रॉस-कॉन्टेमिनेशन की रोकथाम और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। निरीक्षण के दौरान मिली गंभीर कमियों के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।