लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश की नई आबकारी (एक्साइज) नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों और ड्रग्स पर बढ़ती निर्भरता को कम करना, आबकारी राजस्व को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से बढ़ाना तथा पर्यटन को बढ़ावा देना है। प्रशासन का मानना है कि यह नीति सार्वजनिक सुविधा, पर्यटन, राजस्व वृद्धि और शराब व्यापार के प्रभावी नियमन के बीच संतुलन स्थापित करेगी।
नई नीति तैयार करने से पहले नागरिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं, धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की गई। इन बैठकों में यह चिंता सामने आई कि हार्ड लिकर की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ लोग अवैध नशीले पदार्थों, तस्करी की शराब और नकली शराब की ओर रुख कर रहे हैं। लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी अधिकृत दुकानों पर शराब के विकल्प बढ़ाने का सुझाव दिया था।
इन सुझावों के बाद उपराज्यपाल ने मौजूदा आबकारी नीति की समीक्षा के निर्देश दिए और अधिकारियों की एक समिति गठित की गई। समिति ने सार्वजनिक सुविधा, अवैध शराब व्यापार की रोकथाम, सामाजिक प्रभाव, राजस्व वृद्धि, लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया।
नई नीति के तहत अब हार्ड लिकर, विदेशी शराब और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की बिक्री अधिकृत रिटेल दुकानों के माध्यम से की जा सकेगी। पहले केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों की बिक्री की अनुमति थी। साथ ही शराब, बीयर और वाइन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को भी तर्कसंगत बनाया गया है।
पर्यटन और उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए लद्दाख में 20 नई शराब की दुकानें ई-नीलामी के जरिए खोली जाएंगी। पहले पूरे लद्दाख में केवल दो शराब की दुकानें संचालित थीं। अब नुब्रा, चांगथांग, शम और जांस्कर जैसे क्षेत्रों में भी शराब उपलब्ध होगी, जबकि पहले यह सुविधा केवल लेह शहर तक सीमित थी।
नई नीति के तहत पहली बार गेस्ट हाउस और होमस्टे को भी निर्धारित लाइसेंस शुल्क के भुगतान पर शराब बेचने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा माइक्रोब्रुअरी वाले बीयर बार खोलने की भी अनुमति होगी। अब होटल परिसरों और कमरों में शराब सेवन की अनुमति रहेगी, जबकि पहले यह केवल बार क्षेत्र तक सीमित था।
लाइसेंस प्रक्रिया को भी काफी सरल बनाया गया है। अब एक्साइज लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 16 से घटाकर केवल 6 कर दी गई है। जिला प्रशासन की अनिवार्य राय लेने की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है, जिससे लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
नई नीति में राजस्व बढ़ाने के लिए थोक लाइसेंस शुल्क को 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया है। लेह नगर क्षेत्र में खुदरा दुकानों की आधार कीमत 60 लाख रुपये और अन्य क्षेत्रों में 30 लाख रुपये निर्धारित की गई है। खुदरा विक्रेताओं का लाभांश भी 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
उपभोक्ता सुरक्षा और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने पर लाइसेंस रद्द करने और सुरक्षा जमा राशि जब्त करने का प्रावधान है। साथ ही उत्पादों पर एक्साइज विभाग द्वारा अनुमोदित सुरक्षा होलोग्राम लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि कर चोरी और नकली उत्पादों पर रोक लगाई जा सके।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक की बोतलों में शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है। शराब केवल स्वीकृत कांच की बोतलों, पीईटी बोतलों और टिन कैन में ही बेची जा सकेगी। इसके अलावा शराब की दुकानें धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक पार्कों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर स्थापित की जाएंगी।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि नई आबकारी नीति जनहित, पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और कानूनसम्मत व्यापार के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इससे अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और लद्दाख में एक अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी आबकारी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।