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कंगना रनौत ने अपने संघर्ष के दौर को किया याद, कहा- अपनी क्षमता से कम स्तर का काम किया

Kangana Ranaut: अभिनेत्री कंगना रनौत का कहना है कि ‘फैशन’ फिल्म की सफलता के बावजूद उन्हें ज्यादा फिल्में नहीं मिली। कंगना ने उस समय के अपने संघर्ष के दौर को याद किया, जब उन्हें फिल्म जगत में टिके रहने के लिए अपनी क्षमता से कहीं कम स्तर का काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हिमाचल प्रदेश के मंडी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने फिल्म जगत में 20 साल पूरे कर लिए हैं। कंगना की अगली फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी। उन्होंने 2006 में अनुराग बसु की फिल्म ‘गैंगस्टर: ए लव स्टोरी’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। कंगना ने ‘वो लम्हे’, ‘लाइफ इन ए मेट्रो’, ‘फैशन’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई और फिर ‘क्वीन’ से लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद उन्होंने ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’, ‘पंगा’ और ‘इमरजेंसी’ जैसी सशक्त महिला प्रधान फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई।

अभिनेत्री ने कहा, “जब भी आप संघर्ष कर रहे हों, उस समय का सदुपयोग करें क्योंकि जीवन आपको कुछ कह रहा है और आपको उसे सुनना चाहिए। जब मेरे पास काम नहीं था, जब मैं संघर्ष कर रही थी, उस समय मैंने खुद से कई सवाल पूछे, जैसे, ‘मुझे काम क्यों नहीं मिल रहा? मैं कुछ बेहतर क्यों नहीं कर पा रही?”

उन्होंने कहा, “यह दौर 2007-2008 के बाद का था, जब ‘फैशन’ के बाद भी मुझे कोई काम नहीं मिला।” कंगना ने बताया कि उन्हें एक ऐसे ‘मैनेजर’ को नियुक्त करने की सलाह दी गई, जो बड़े सितारों के साथ काम करता हो और उन्होंने ठीक वैसा ही किया लेकिन इससे उन्हें ‘रास्कल्स’ और ‘धमाल’ जैसी व्यावसायिक फिल्में मिलीं।

उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि मैं अपनी क्षमता से कमतर काम कर रही थी। लेकिन उस समय मेरे पास वह सुविधा नहीं थी, जैसा कि लोग अक्सर आज कहते हैं, ‘आपको वही करना चाहिए जो आपको पसंद हो’। यह कितना मूर्खतापूर्ण बयान है। आपको वही करना चाहिए जो आवश्यक हो। आपको वही करना चाहिए जो आप कर सकते हैं, आपको वह नहीं करना चाहिए जो आप नहीं कर सकते।”

कंगना ने बताया कि उन्हें आखिरकार सफलता तब मिली जब उन्होंने ‘क्वीन’ और ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्मों में ‘घरेलू’ युवती की भूमिका निभाई। उन्होंने बाद में फिल्मों का निर्देशन और निर्माण भी किया। हिमाचल प्रदेश में जन्मी कंगना ने कहा, “जब मैं फिल्म जगत में आई, तो सभी अभिनेत्रियां मिस वर्ल्ड, सुपरमॉडल, विदेशी थीं, सभी छह से 6.5 फुट लंबी थीं और बेहद खूबसूरत दिखती थीं। वे अलग थीं, साधारण नहीं दिखती थीं, असाधारण महिलाएं लगती थीं।”

उन्होंने कहा, “आखिरकार, मुझे सफलता तब मिली जब मैंने एक साधारण लड़की का किरदार निभाया, चाहे वह ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की दत्तो हो या ‘क्वीन’। जब मैं यहां आई, तो मेरे आस-पास (एक साधारण महिला जैसी) कोई नहीं थी। मुझे एहसास हुआ कि मुझमें एक खास तरह की सहजता है, जो मुझे ‘गैंगस्टर’, ‘फैशन’ या ‘वो लम्हे’ जैसी फिल्मों से मिली है। इसलिए, मुझे लगा कि यही मेरी खासियत है, मेरी स्वाभाविक प्रतिभा और मैंने इस पर काम किया।”

अभिनेत्री ने कहा कि उनकी अभिनय शैली में भी सहजता झलकती है। कंगना (40) ने कहा कि वह अपनी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के माध्यम से उन नर्सों और वार्ड बॉय की बहादुरी को पर्दे पर उतारने से रोमांचित हैं, जो 2008 में 26 नवंबर को हुए भयावह हमलों के दौरान देश के मूक रक्षक बन गए थे। ‘भारत भाग्य विधाता’ में गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे, आशा शेलार, सुहिता थट्टे, रसिका अघासे, आदित्य मिश्रा और जाहिद खान जैसे कलाकार शामिल हैं। फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।