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ईरान युद्ध का एक महीना पूरा, संघर्ष थमने के नहीं दिख रहे आसार, युद्धविराम की कोशिशें जारी

West Asia Conflict: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को शुरू हुए एक महीना हो गया है, और फिलहाल इसके थमने या धीमा पड़ने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इनमें उसके सैन्य ठिकानों, मिसाइल प्रणालियों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था। ईरान ने भी करारा जवाब दिया। अमेरिका-इजराइल के हमले मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों, सटीक-निर्देशित बमों और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों पर आधारित रहे हैं।

ईरान के लिए, उसकी जवाबी कार्रवाई का एक अहम हिस्सा उसकी हथियारों की रणनीति रही है। उसने एकतरफ़ा हमला करने वाले शाहेद ड्रोन का बड़े पैमान पर इस्तेमाल किया है। ये ड्रोन धीमे, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले और सस्ते होते हैं। अक्सर इन्हें बड़ी संख्या में इसलिए छोड़ा जाता है ताकि हवाई सुरक्षा प्रणालियों पर भारी दबाव डाला जा सके। इनके बाद बैलिस्टिक मिसाइलें आती हैं, जो कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से चलती हैं और ज्यादा घातक होती हैं।

ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई में न सिर्फ इजराइल को निशाना बनाया, बल्कि उसने खाड़ी के कई ऐसे देशों पर भी हमले किए जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इनमें कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात शामिल
हैं। इन हमलों से इस क्षेत्र का और भी बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर इस संघर्ष की चपेट में आ गया।

यह युद्ध जल्द ही दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं रह गया। संघर्ष कई देशों तक फैल गया।लेबनान में हमलों की खबरें आईं, ईरान समर्थित गुटों ने अपने हमले तेज़ कर दिए, और पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया। अब डर एक कहीं ज्यादा बड़े क्षेत्रीय युद्ध का है। जमीन पर, इसका असर बहुत गहरा रहा है। तेहरान में बार-बार धमाके हुए हैं। इजराइल में, हवाई हमले के सायरन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

जान-माल का नुकसान बढ़ता जा रहा है। ईरान में 1,900 से ज्यादा और लेबनान में 1,100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। इजराइल में 18 लोगों की मौत हुई है, जबकि कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इस पूरे इलाके से लोगों के मारे जाने की खबरें आई हैं, जिसमें इजराइल के कब्जे वाला वेस्ट बैंक और खाड़ी देश भी शामिल हैं।

लेकिन यह युद्ध केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं लड़ा जा रहा है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को एक तरह से बंद कर दिया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और वैश्विक बाजारों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है। एक महीने से जारी युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें की जा रही हैं और संभावित युद्धविराम की बात हो रही है।