बांग्लादेश में अवामी लीग के वरिष्ठ हिंदू नेता एवं पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश चंद्र सेन की शनिवार सुबह दिनाजपुर जिला जेल में हिरासत के दौरान मौत हो गई। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से महज कुछ दिन पहले हिरासत में 83 वर्षीय सेन की मौत ने हिरासत में लिए गए अन्य राजनेताओं के साथ होने वाले व्यवहार और चिकित्सा देखभाल के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 अप्रैल, 1940 को जन्मे सेन ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र का कई बार संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके थे। वह अवामी लीग के वरिष्ठ नेता के साथ-साथ प्रेसिडियम सदस्य भी रहे थे।
जेल अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तड़के उनकी तबीयत बिगड़ी जिसके बाद उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां सुबह लगभग 9:29 बजे डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक फरहाद सरकार ने पुष्टि की है कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
सेन 16 अगस्त, 2024 से हिरासत में थे। उन पर हत्या सहित तीन मामले दर्ज थे, जो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हुए जन विद्रोह के बाद की राजनीतिक हिंसा से जुड़े थे। अंतरिम सरकार और चुनावी माहौल पर प्रभाव नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को पहले से ही मानवाधिकारों और हिरासत में मौतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि अवामी लीग के नेताओं की हिरासत में मौतें व्यवस्थागत समस्याओं और राजनीतिक प्रतिशोध की ओर इशारा करती हैं। चूंकि चुनाव लड़ने से अवामी लीग पर रोक लगा दी गई है, ऐसे में एक कद्दावर नेता के निधन ने बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। यह घटना अब देश में न्याय, शासन और कानून के शासन पर होने वाली चर्चाओं का केंद्र बन गई है।