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प्रदेश में आवासीय सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की नई पहल, गाजियाबाद बना मॉडल जिला

लखनऊ: स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार में निरंतर नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में औरैया के बाद गाजियाबाद जनपद ने आवासीय सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाते हुए प्रदेश के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया है। गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने औरैया के जिलाधिकारी का अनुकरण करते हुए आदेश जारी किया। अब जनपद में नए बनने वाले आवासीय भवनों के नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में सोलर रूफटॉप सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल बिजली की बचत करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को भी सुनिश्चित करना है।

स्वच्छ ऊर्जा का दायरा होगा व्यापक
इस प्रस्ताव के अंतर्गत संबंधित नगर पालिकाएं, नगर निगम एवं नगर पंचायतें अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में प्रस्ताव पारित कर इस व्यवस्था को लागू कर सकतीं हैं। नक्शा स्वीकृति के बाद भवन निर्माण में सोलर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली का क्रियान्वयन अनिवार्य होगा। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा व्यापक होगा।

अन्य जनपदों के लिए अनुकरणीय मॉडल
योगी सरकार गाजियाबाद जनपद की इस पहल को अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय मान रही है। सरकार का मानना है कि प्रदेश के सभी जनपदों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तृतीय श्रेणी शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर आवासीय सोलर कवरेज बढ़ाने के प्रयास करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में तेजी से अग्रसर हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 1440 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे 60 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह बिजली बिना कोयला जलाए उत्पन्न की जा रही है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

करीब 5000 एकड़ भूमि का संरक्षण
रूफटॉप सोलर के माध्यम से आम नागरिकों को प्रतिदिन औसतन लगभग 4 करोड़ रुपये की बिजली बचत का लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त इस पहल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 60 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही सोलर रूफटॉप मॉडल के कारण 5000 एकड़ से अधिक भूमि का संरक्षण संभव हो सका है, जिसे अब अन्य विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए मज़बूत हो रही है। योगी सरकार का मानना है कि औरैया का यह मॉडल प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू होने से उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और हरित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम साबित करेगा।